वह घुंघराले बाल और संतूर की मिठास ! आह !
पंडित शिव कुमार शर्मा का संगीत तो अमर है , सर्वदा रहेगा। मेरे मन में भी। मेरे लिखने में भी पंडित शिव कुमार शर्मा का संतूर बजता ही रहेगा। बस वही नहीं रहेंगे।
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