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क्या खान सर को विद्यार्थियों को भड़काने तथा चलती ट्रेन में आग लगवाने का हक है?

खान सर ने हमास जैसे आतंकवादी संगठन को बड़े सॉफ्ट अंदाज से सपोर्ट किया था। तभी मैं उनका एजेंडा पहचान कर विरोध किया था। इजराइल के सामने तो अच्छे-अच्छे मोमिनों की तहजीब निखर आती है। फैजल खान…

मुजफ़्फ़र नगर और कैराना दोनों को बहुत अच्छी तरह क्यों याद है ?

समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच जूतमपैजार शुरु हो गई है। घमासान मच गया है। वीडियो वार हो रहा है। मुसलमान कह रहे हैं कि हम जाटों को सबक़ सिखाएंगे। जाट कह रहे हैं कि हम मुसलामानों को…

दही समझ के चूना क्यों चाट गई तिकड़ी?

आरपीएन सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद स्वामीप्रसाद को यह भी समझ में आ गया है कि उसके लिए पड़रौना से खुद अपना चुनाव जीतना भी लोहे के चने चबाने के समान ही सिद्ध होने जा रहा है। कुल मिला कर…

नेहरू ने 25 साल बाद सुभाष चंद्र बोस के लिए वकालत की अपनी कोट क्यों पहनी ?

नेहरू ने वकालत के नाम पर दिखावा करने की कोशिश क्यों की? गांधी ने सुभाष चंद्र बोस के हिंसा का हवाला देकर नेहरू को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की? गांधी इरविन समझौता में भगत सिंह को न बचाने के…

सुभाषचन्द्र बोस की प्रतिमा को सम्मान पूर्वक स्थापित कर मोदी ने षड्यंत्रों को कैसे धूल…

6-7 दशक लंबे सुनियोजित सुसंगठित कांग्रेसी षड्यंत्रों की धज्जियां आज उस प्रधानमंत्री ने एकबार फिर उड़ा दीं जिसका जन्म गुजरात के एक छोटे से गांव वडनगर के एक निर्धन विपन्न परिवार में हुआ और…

भारत की चुनावी राजनीति बड़ी दरिद्र राजनीति क्यों है ?

Positive India:Dayanand Pandey: भारत की चुनावी राजनीति भी बड़ी दरिद्र राजनीति है। वोटर हो , प्रत्याशी हो , पार्टी या मीडिया सब के सब यही हिसाब लगाते हैं कि मुसलमान किसे वोट देगा , दलित किसे…

नेताजी एक मात्र ऐसे शख्सियत हुए जिन्होंने अपने जीवन के साथ-साथ अपना मृत्यु भी बलिदान…

नेता जी को अपार जनसमर्थन आज एक बार फिर भारत के जनमानस में देखने को मिल रही है। जैसे लग रहा है नेताजी की कभी मरे नहीं तो आज भी जीवित ही हैं। उनकी 125 वी जन्म जयंती पर उनको मेरा शत-शत नमन।

यूपी की जनता के अंदर 2017 से भी बड़ा ज्वालामुखी क्यों खदबदा रहा है ?

यूपी की जनता के अंदर 2017 से भी बड़ा ज्वालामुखी खदबदा रहा है,जिसकी ऊष्मा को विरोधी दल भांप नही पा रहें हैं....10 मार्च को जब इसका विस्फोट होगा तो विश्वास करिये कि इसके केसरिया लावे के कोप से…

अखंड ज्योति के पीछे विवाद खड़ा करना तो बहाना है। असल मुद्दा तो सुभाष चंद्र बोस की…

जिस प्रकार से भारत सुभाष चंद्र बोस को स्वीकारते जा रहा है, एक वक्त आएगा जब सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रपिता तो नहीं लेकिन राष्ट्रनायक बनकर लोक विमर्श में स्थापित हो जाएंगे। क्या तब भी कोई…