जब मुझे लगा कि बुद्ध मुझसे कानों में कुछ कह रहे हैं
रोमांचक और खूबसूरत जीवन की चुनौतियों के बदले मुक्ति का श्मशान जैसा सन्नाटा मुझे आकर्षित नहीं करता... अपनी असंख्य तृष्णाओं पर थोड़ा नियंत्रण और अनुशासन तक तो ठीक है...लेकिन इनसे मुक्ति ?
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