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किसी लेखक के लिए किसी खूंटे में बंध कर रहना बिलकुल ज़रुरी नहीं

कम्युनिस्ट हो कर एकपक्षीय , एजेंडाधारी , अराजक और विषैला होना बहुत बुरी बात है । सभी लोग इस तत्व से चिढ़ते हैं । उन की हिप्पोक्रेसी से चिढ़ते हैं ।

आपको अगर भविष्य में हिंदू राष्ट्र चाहिए, तो वोट कीजिए, अन्यथा…

अगर ये बदलना है,तो आराम को लात मारकर,अपनी देह से बाहर करिए,और वोट करिए,नहीं तो भूल जाइए अपने त्योहार मनाना जिस जोश से पिछले कुछ वर्षों से आप परिवार संग मना पा रहे हैं,हर हर महादेव,जय श्री…

राहुल गांधी ने सैम पित्रोदा के जरिए संपत्ति वितरण का आईडिया क्यों फ्लोट करवाया?

सैम पित्रोदा और राहुल गांधी जिस सम्पत्ति वितरण की बात कर रहे हैं उसकी गाज तों नवधनाढ्य वर्ग पर पड़नी है । बड़े बड़े औद्योगिक घराने निशाने पर आयेंगे ।

इस चुनाव के बाद भविष्य में जातिवादियों की लंका लगनी क्यों तय है?

राजपूतों का भी एक वर्ग घृणित जातिवाद के विरुद्ध है। यही प्रवृत्ति scst और मुसलमानों तक में शुरू हो गई है। कुछ वर्गों में यह 10:90 है तो कई जगह 50:50 है। और जहां बाजी पलट चुकी है, अर्थात…

प्रशिक्षित बुद्धि और अप्रशिक्षित बुद्धि में क्या भेद है?

Positive India: Sushobhit: जीवन के हर क्षेत्र में एक्सपर्ट और एमेच्योर का द्वैत आपको दिखाई देगा। आप अभी यहां बैठे हैं, आप तुरंत ही उठकर कथक नृत्य नहीं कर सकते, यह वही कर सकता है जिसने उसका…

“जिसकी कमर टूट गयी हो, उसकी गर्दन कोई भी तोड़ सकता है।”-पेशवा बाजीराव

किसी ने पूछा पेशवा से, "अब?" उसने मुस्कुरा कर कहा- दिल्ली देखने आये थे, सो देख लिया। इसे तो जब चाहें तब जीत लेंगे। चलो वापस, दिल्ली की कमर टूट गयी है। जिसकी कमर टूट गयी हो, उसकी गर्दन कोई भी…

क्या पता डिसकवरी आफ़ इंडिया की तरह कभी कोई डिसकवरी आफ़ लतीफ़ा गांधी भी लिखे

राजीव गांधी और संजय गांधी तो मुंह में चांदी का चम्मच ले कर पैदा हुए थे। लेकिन राहुल गांधी मुंह में सोने का चम्मच ले कर पैदा हुए। वह सोने का चम्मच अभी उन के मुंह से निकला नहीं है। बाक़ी सोनिया…