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वामपंथी

क्या लेफ्ट लॉबी ने स्वीकार लिया है कि भारत विश्व पटल पर उभर कर आया है ?

यूक्रेनियन राजदूत डॉ इगोर पोलिखा ने कहा कि भारत ग्लोबल पावरफुल प्लेयर है और मोदी जी इज वन ऑफ द मोस्ट पावरफुल रिस्पेक्टेड लीडर ऑफ द वर्ल्ड। पोलिखा के इस बयान को कोई डिजाइनर मीडिया लिखने…

हिन्दू और हिंदुत्व से पहले कांग्रेस ने देश और राष्ट्र का खेल क्यों खेला था?

हिंदू और हिंदुत्व के बीच खाई को बढ़ाकर राजनीति करने का वक्त आ चला है। तमाम वामपंथी, उदारवादी, कांग्रेसी अब इस हिंदुत्व के विरोध में अपना कौन-कौन सा एजेंडा किस प्रकार से विमर्श में उतारेंगे…

नफरत की पहचान मुनव्वर फारुकी ने वामपंथियों का दिल क्यों जीत लिया ?

बेंगलुरु में आयोजित होने वाली एक कॉमेडी शो रद्द होने के पश्चात् मुनव्वर का कहना है "नफरत जीत गई और एक कलाकार हार गया"। जो फारुकी स्वयं नफरत की एक पहचान है उसके मुंह से नफरत के खिलाफ ऐसे मधुर…

वामपंथी और विपक्षी पार्टियां हिंदू बनने का पाखंड क्यों कर रही है?

देश के 136 साल पुरानी पार्टी के समर्थक और उसके संरक्षक वामपंथी नक्सली कथित विद्वानो ने अपने अस्तित्व को बचाने का एक अन्तिम अभियान छेड कर अपने दल को बचाने के लिये केवल कुतर्की बयान दे रहे है।…

लखीमपुर में लाशों के साझे चूल्हे पर रोटी सेंकते लोग और कुछ सवाल

राहुल गांधी के इशारों पर अभी तक नाचने वाले राकेश टिकैत ने अचानक पाला बदल कर कल लखीमपुर में समझौता करवा कर अपनी निष्ठा बदल कर हाल-फ़िलहाल योगी सरकार की ज़बरदस्त मदद कर दी है। नहीं अगर कल यह…

भारत अब कृषि प्रधान देश नहीं कारपोरेट प्रधान देश है

भारत अब कारपोरेट प्रधान देश है। यह तथ्य किसान आंदोलन के खिदमतगारों को जान लेना चाहिए। इस सचाई को हमारे वामपंथी साथियों समेत तमाम आंदोलनकारियों को समय रहते जान-समझ लेना चाहिए। आवारा पूंजी ही…

तथाकथित सेक्यूलर सूरमाओं तथा जनसंघ का विश्लेषण

जितने भी अपने को दलित बुद्धिजीवी मानते हैं, सब के सब हिप्पोक्रेट हैं। इन की कोई भी लड़ाई और लफ्फाजी दलितों के लिए नहीं , आरक्षण और सुविधा की मलाई चाटने के लिए ही होती है। जातीय नफ़रत और जहर की…

पश्चिम बंगाल को अब सिर्फ़ और सिर्फ़ सेना और सेना के बूट ही संभाल सकते हैं

ममता बनर्जी के कुशासन ने सेक्यूलरिज्म का पहाड़ा पढ़-पढ़ कर इस सांप्रदायिकता की भट्ठी को और गरम कर दिया है। इतना कि अब इसे सिर्फ़ और सिर्फ़ सेना और सेना के बूट ही संभाल सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने की रची जा रही है गहरी साजिश

सोनिया गांधी के सर्वाधिक करीबी एवं विश्वसनीय पी. चिदम्बरम ने दो दिन पूर्व खुलेआम यह आह्वान कर दिया कि देश के लोग सड़कों पर उतर कर विद्रोह कर दें। आम आदमी की भाषा में चिदम्बरम के इस आह्वान का…