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रजनीश

गीता कहती है कि संसाररूपी जो वृक्ष है, उसमें मूल ऊपर है, शाखाएँ नीचे हैं!

जैसे वृक्ष की जड़ें पाताल में होती हैं और वहाँ से वृक्ष का तना फूटकर आकाश की ओर बढ़े चला जाता है, उसके ठीक उलट, जो सर्वोच्च पद है, उस ब्रह्म से संसार की व्युत्पत्ति होती है और उसके बाद…

कभी नहीं जन्मे, कभी मरे नहीं…

10 अप्रैल 1989 को रजनीश ने अपने जीवन का अंतिम सार्वजनिक व्याख्यान दिया। यह 'द ज़ेन मैनिफ़ेस्टो' पुस्तक में संकलित हुआ है। वह व्याख्यान इन शब्दों के साथ समाप्त हुआ था : "गौतम बुद्ध के अंतिम…

कुम्भ मेले में एक आईआईटीयन को देखकर भारत-देश की जनता विस्मय-विमुग्ध हो गई

वास्तव में, अत्यन्त मेधावी होना संन्यासी होने की पहली शर्त है। गीता का 'कर्म-संन्यास' और 'मोक्ष-संन्यास'! यह उपदेश एक सुशिक्षित अर्जुन को दिया जा रहा है। शंकराचार्य ने 'विवेकचूड़ामणि' में…

श्री प्रेमानंदजी वर्तमान काल के अत्यन्त लोकप्रिय संत क्यों हैं?

चूंकि श्री प्रेमानंद जी नैष्ठिक ब्रह्मचारी हैं, इसलिए इन्द्रिय संयम का उपदेश देते हैं। युवाओं से ब्रह्मचर्य व्रत के पालन का आग्रह करते हैं। युवतियों से कहते हैं कि विवाह तक 'पवित्र' रहें।…

जैन समुदाय वन्दनीय क्यो है ?

माँसाहार को जीवनशैली या भोजन की पसंद का विषय समझने वाले माँसभक्षियों को अनुमान नहीं है कि मनुष्यों के नीचे जो पशुओं का लोक है, वहाँ कितना सघन विषाद इस अनाचार के कारण निर्मित हो गया है, और…