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नकली रेमडेसीविर इंजेक्शन लगाने वाले मोखा के नर्सिंग कॉलेज की जांच शुरू

क्या रायपुर में कारपोरेट हॉस्पिटलों द्वारा संचालित नर्सिंग कॉलेजो की जांच होगी?

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Positive India:Raipur:
सरबजीत सिंह मोखा, जिसने 400 नकली रेमडेसीविर इंजेक्शन सिटी अस्पताल जबलपुर में भर्ती कोरोना के मरीजों को लगवा दिया था फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अधीन जेल में बंद है। पति,पत्नी,बेटा मैनेजर सोनिया सभी जेल में है। धोखा घड़ी का पर्याय माने जाने वाला सरबजीत सिंह मोखा की पत्नी जसमीत कौर ने मैनेजर सोनिया के साथ मिलकर नकली इंजेक्शनो के शीशियाँ तोड़कर उसके पाउडर को नष्ट कर दिया था।
जबलपुर प्रशासन सिटी हॉस्पिटल में मरीजों की भर्ती पर पहले ही रोक लगा चुका है। मालूम हो सिटी हॉस्पिटल में जनरल सर्जरी के साथ-साथ कैंसर का ट्रीटमेंट भी होता था। अंदेशा है कि कैंसर मरीजों के साथ भी इसके संचालक मोखा ने जबरदस्त धोखाधड़ी की है।
मोखा की कारगुजारियों के चलते सिटी हॉस्पिटल द्वारा संचालित इंदिरा गांधी नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज भी जांच के दायरे में आ चुका है। आरोप है कि मोखा ने फर्जीवाड़े का सहारा लेकर इस कॉलेज की मान्यता प्राप्त की है। अगर नियमों को देखा जाए तो एमपी नर्सिंग काउंसिल के मुताबिक नर्सिंग कॉलेज के संचालन के लिए कम से कम 25000 स्क्वेयर फीट जमीन के बिल्डअप एरिया होना आवश्यक है; परंतु अपने रसूख के चलते, फर्जीवाड़ा के चलते और मिलीभगत की वजह से सरबजीत सिंह मौखा अपने इस कॉलेज को सिर्फ 5000 वर्गफीट में संचालित कर रहा था। जिस बिल्डिंग में कॉलेज के छात्रों की पढ़ाई होनी थी, वहां पर सिटी हॉस्पिटल का ट्रामा सेंटर चल रहा था। क्या बिना प्रशासन के मिलीभगत के ऐसा हो रहा था?
फिलहाल जबलपुर कलेक्टर ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है, सब कुछ सामने आ जाएगा।

पर रायपुर का क्या जहां पर कारपोरेट हॉस्पिटल अपनी-अपनी नर्सिंग कॉलेज एंड पैरामेडिकल कॉलेज चला रहे हैं? क्या छत्तीसगढ़ में नर्सिंग काउंसिल की गाइडलाइन के मुताबिक कॉलेजों का संचालन हो रहा है ? यह जांच का विषय है। पर क्या स्वास्थ्य विभाग इस तरह की जांच में हाथ डाल पाएगा? क्योंकि छत्तीसगढ़ में हॉस्पिटल संचालित कर रहे कारपोरेट बहुत शक्तिशाली हैं।

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