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हमर भाँचा राम कौशल्या के राम

विगत 500 वर्षो से हो रहा इंतजार हुआ खत्म ।

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Positive India:Gajendra Sahu:
आज भारतवर्ष ही नही, अपितु सारा संसार राम भक्ति मे विलीन है। मानसिक भाव भी सुबह से आज किसी बड़े त्योहार का एहसास करा ही रहा है। आज अखबारों मे भी कोरोना जैसी महामारी को लपेटकर कही छुपा दिया है। मीडिया जगत भी अपनी न्यूज़ मे चलने वाली पट्टी हैड-लाईन से भारत और चाइना युद्ध को रोक कर रखी हुई है। यदि बात करूँ सोशल मीडिया की तो फ़ेसबुक मे आज राम नाम की बाढ़ आ चुकी है, और मेरे वॉट्सएप्प कॉन्टैक्ट मे भी कोई ऐसा नही जिसने आज राम का नाम लिये बिना दिन की शुरुवात की हो। एक बात और यदि ये कोरोना न होता तो आज आयोध्या हमारे भारत की जनसँख्या से निश्चित रुप से परिचित हो जाता।

वाल्मिकी रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दसरथ का विवाह कोसल की राजकुमारी कौशल्या से हुआ। जब राजा दसरथ को संतान सुख की प्राप्ति नही हो रही थी तब वे अयोध्या से कोसल नंगे पाव चलकर सिहावा पर्वत पर निवास करने वाले श्रिंगी ऋषि से आशीर्वद लेने आए। फिर उन्हे चार पुत्रो की प्राप्ति हुई । माता कौशल्या से राम, कैकयी से भरत व सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न।
श्री राम को जन्म देने वाली माता कौशल्या का जन्म ही कोसल अर्थात् वर्तमान छग मे ही हुआ था। इसलिए प्रभु श्री राम का संबंध छग से बहुत पुराना है । पूरे विश्व मे केवल रायपुर का चद्रखुरी ही ऐसा स्थान है जहां माता कौशल्या का मन्दिर है।

कोसल अर्थात् वर्तमान छग भगवान राम का ननिहाल है और भगवान राम हमारे भांजे है। इसलिये आप पायेंगे की छग और आस-पास के कुछ हिस्सो मे भाँजा-भांजियो के पैर छुए जाते है।शादियों मे भाँजा-भांजियो की पूजा कर उन्हे उपहार दिए जाते है।

जब हमारे भांजे श्री राम मन्दिर का निर्माण हो रहा है तो उनके ननिहाल मे भी वर्तमान छग सरकार द्वारा श्री राम द्वारा बिताए गए वनवास कालीन स्थानों को चिन्हित कर राम वनगमन पथ के अधार पर सुनियोजित ढंग से निर्माण कर पर्यटन स्थल मे परिवर्तित किया जा रहा है। कुल 51 स्थानो को चिन्हित कर शुरुआत मे 9 जगहो का कार्य आरंभ कर दिया गया है। जिसमे सबसे पहले 22 दिसंबर 2019 को चन्द्रखूरी मे माता कौशल्या के मन्दिर के जीर्णोद्धार का कार्यक्रम किया गया। राम वनगमन पथ कोरिया से कोन्टा तक चिन्हित किया गया है। इस कारण यह खुशी हमारे लिये दुगुनी हो चुकी है।

आज खुशी का दिन है। जिस दिन की प्रतीक्षा विगत 500 वर्षो से हो रही थी आज वह स्वर्णिम पल आ चुका है। ऐसे मे उनके ननिहाल मे खुशियाँ न मनाई जाए, ऐसे कैसे हो सकता है। आइये हम सब मिलकर अपने भाँजे श्री राम मन्दिर निर्माण के अवसर पर एक उत्सव मनाए और दिए जलाए।
लेखक:गजेन्द्र साहू – रायपुर।

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