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रामलला को देख देख कर मन अह्लादित है किंतु सावधान !!
रामलला के मंदिर परिसर मे धक्का मुक्की करते बेकाबू जनमानस को देख कर अंदर ही अंदर एक अनजाना भय भी पैदा हो गया कि केवल दो महीने आम चुनाव मे रह गये हैं....और इसी भीड़ मे जलनखोरो के टूलकिटिये…
राम लला की प्राण प्रतिष्ठा संभवत: #विश्वरिकॉर्ड होगा।
Positive India:Kumar S Charit:
संसार में एक साथ, एक दिन, एक ही समय इतना दुलार, इतना प्यार, इतनी श्रद्धा, इतना वात्सल्य किसी को न मिला होगा।
संसार का सबसे धनिक और निर्धन दोनों रो रहे थे।…
गुरुकुल महिला महाविद्यालय में मनाया श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा उत्सव
पॉजिटिव इंडिया ,रायपुर
गुरुकुल महिला महाविद्यालय में आज अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष में हवन एवं पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्राओं…
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही भारत गुलामी की मानसिकता को तोड़कर उठ खड़ा हो गया
राम भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं। राम भारत का विचार हैं, राम भारत का विधान हैं। राम भारत की चेतना हैं, राम भारत का चिंतन हैं। राम भारत की प्रतिष्ठा हैं, राम भारत का प्रताप हैं।…
Modi Govt Holds Third Meeting On Simultaneous Elections In The Country
Altogether 20,972 responses were received out of which 81% affirmed the idea of simultaneous election. Besides, suggestions were also invited from 46 political parties. Till date,…
सारा जगत् ही सीता राम मय क्यो हो गया है ?
सनातन धर्म सही अर्थों में एकेश्वरवादी धर्म है । सारा जगत् ही सीता राम मय है । हमारा राम सातवें आसमान में नहीं बैठता वह तो रोम रोम में रमनेवाला राम है । उसकी मूर्ति से अधिक फलप्रद तो उसका नाम…
धर्मस्त्वामभिरक्षतु… मेरे प्रधानसेवक ! धर्म आपकी रक्षा करे!
आज से दस वर्ष पूर्व तक कोई सोच भी नहीं सकता था कि ऐसा होगा। आपने युग बदल दिया मोदी जी! युग बदल दिया.
चिरयौवना अयोध्या की अधिष्ठात्री देवी अयोध्या को प्रणाम कीजिए !
अयोध्या है कौन जिस के नाम पर यह नगर अयोध्या बसा? नहीं जानते तो पढ़िए कभी कालिदास लिखित रघुवंशम् । तो पता चलेगा कि अयोध्या एक स्त्री का नाम है।
इस बार केवल एक मन्दिर में देव की प्राणप्रतिष्ठा ही नहीं हो रही। यह युगपरिवर्तन का…
मनुष्य ईश्वर की प्राणप्रतिष्ठा कैसे कर सकता है? बकवास प्रश्न है यह। मनुष्य मूर्ति में ही नहीं, सृष्टि के कण कण में देवता को देख सकता है, पर इसके लिए हृदय में श्रद्धा होनी चाहिये।
चंदखुरी के फुटहा मंदिर के खंडहरों की खामोशियों को सुनिए। वे राम कथा सुनाती हैं
फुटहा मंदिर आठवीं शताब्दी का है, और तुलसीदास जी यही कोई 500 बरस हुए। फुटहा मंदिर में राम कथा के प्रसंग उत्कीर्ण हैं। अर्थ यह हुआ कि तब लोग न केवल राम को जानते थे, बल्कि रामकथा भी जानते थे।