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राजनारायण और राहुल गांधी में क्या फर्क है?
राजनारायण और राहुल गांधी में एक बड़ा फ़र्क़ है। राजनारायण लोगों को प्रत्यक्ष रूप से हंसाते थे। राहुल गांधी अमूमन अप्रत्यक्ष रूप से हंसाते रहते हैं। राजनारायण समझ जाते थे कि लोग क्यों हंस रहे…
अहलान मोदी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-UAE दोस्ती ज़िंदाबाद का नारा क्यों…
Positive India:New Delhi:
आज अबू धाबी में आप लोगों ने नया इतिहास रच दिया है। आप लोग UAE के कोने-कोने से आए हैं और भारत के भी अलग-अलग राज्यों से आए हैं, लेकिन सब के दिल जुड़े हुए हैं। इस…
किसानों के वेश मे दिल्ली पर टूलकिटिया गैंग आक्रमण करने की प्रयोजित तैयारी मे हैं
अब बात पुलिस की नहीं, हिन्दू समाज बनाम गद्दारों की है।
हमें संकट के ऐन समय पर पुलिस बचाने नहीं आएगी, इतना तो हल्द्वानी मे एक बार फिर से सुनिश्चित हो गया है
राहुल गांधी , अखिलेश यादव और तेजस्वी में कौन बेहतर है ?
Positive India: Dayanand Pandey:
अगर मुझ से कोई पूछे तो तमाम असहमतियों और नापसंदगी के बावजूद मैं तेजस्वी यादव का नाम लूंगा। भले नौवीं फेल हो , क्रिकेट में भी क़ामयाब न हुआ हो तो भी नीतीश…
हल्द्वानी दंगा गवाह है कि कांग्रेस ने उत्तराखंड को बर्बाद कर देने की पूरी योजना बना…
उत्तराखंड के निवासी पिछले कई वर्षों से लगातार इस इस अवैध कब्जे का विरोध करते रहे हैं। "ये बेचारे और कहाँ जाएंगे" की फर्जी दलील के बल पर कोर्ट भी उनका साथ नहीं देता, और कांग्रेस की तो…
नेहरू कभी भी किसी के सामने नहीं रोते तो क्या कोई और नहीं रो सकता
नेहरू तो नेहरू , इंदिरा गांधी को भी फ़िरोज़ गांधी , नेहरू और फिर संजय गांधी की मृत्यु के बाद भी किसी ने कभी रोते नहीं देखा। संजय गांधी को भी किसी ने कभी रोते नहीं देखा। राजीव गांधी , सोनिया…
आंदोलनजीवी एक धंधा क्यों है?
आंदोलन तो बिना प्रोफेशनल आंदोलनकारियों की सेवायें लिये हो ही नहीं सकता ।
आडवाणी बीज हैं , नरेंद्र मोदी उस का फल
लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न क्या मिला , कई सारे पके-अधपके फोड़े फूट गए हैं। इन फोड़ों का बदबूदार मवाद , ऐसे बह रहा है जैसे नाबदान में सीवर का पानी।
आडवाणी जी के साथ फ्रेम अब पूरा हुआ।
आडवाणी जी राष्ट्रवादी राजनीति में संघर्ष का सबसे प्रमुख चेहरा हैं। उनकी यात्रा राजनीति को टोपी से तिलक तक लाने की यात्रा रही है।
हाय ! हम क्यों न हुए खुशवंत !
खैर बात यहां हम खुशवंत सिंह की कर रहे हैं। वह खुशवंत सिंह जो खुद को संजय गांधी का पिट्ठू कहता था। पर क्या सचमुच ही वह पिट्ठू था किसी का? मुझे तो लगता है कि खुशवंत सिंह अगर किसी एक का पिट्ठू…