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India
सम्राट अशोक ने अपने अभिलेखों में स्वयं को “देवानंपिय पियदसि लाजा” से…
सिद्ध हुआ कि यह अशोक ही थे, जिन्होंने 'देवानंपिय पियदसि' के नाम से पूरे भारतवर्ष में यत्र-तत्र बीसियों अभिलेख उत्कीर्ण करवाए थे। इतिहास का पुनर्लेखन हुआ। व्यापक पुरातात्विक विवरणों के आलोक…
कुतुब मीनार किसी कुतुबुद्दीन का बनवाया हुआ नहीं है
सल्तनत काल में भारत की आत्मा पर बहुत प्रहार हुआ है, और हर प्रहार का चिन्ह भारत की छाती पर अब भी दिखता है। जाने कब ये चिन्ह मिटेंगे।
जिनका दावा है कि उन्होंने आठ सौ साल हम पर हुकूमत की उनके लिए
आठ सौ साल हमारा संघर्ष चला किंतु हम पहली बार सन सैंतालिस में तब हारे जब देश के एक हिस्से से हमने अपना दावा छोड़ दिया ।
तो पूरा भारत ही अब तक इस्लामी राष्ट्र होता , हम सभी मुसलमान होते , तालिबान होते
जिस ने धर्म के नाम पर पाकिस्तान बनाया , उस जिन्ना का नाम लेते हुए इन की जुबान को लकवा मार जाता है। पाकिस्तान बनाने के लिए डायरेक्ट एक्शन करवाया जिन्ना ने । डायरेक्ट एक्शन मतलब हिंदुओं को…
बयाना मुद्राभांड का भारतीय इतिहास में बड़ा महत्व है
बयाना मुद्राभांड प्राचीन भारत का यह सबसे बड़ा मुद्रा भंडार है जो एक स्थान पर मिला है और यह भारत के स्वर्ण युग के इतिहास पर प्रकाश डालता है । सिक्कों की शुद्धता भी उस युग की सम्पन्नता पर…
पैरों से तीर चला कर ओलंपिक मेडल जीतने वाली शीतल देवी आदर्श है अपनी पीढ़ी के लिए
शीतल देवी उसी दिन से विजेता है, जिस दिन उसने अपने पैरों से धनुष उठाना सीख लिया था। ओलंपिक का पदक तो उसकी बड़ी यात्रा का एक सुखद पड़ाव भर है।
IC 814 का अपहरण करने वाले अपहरणकर्ताओं को हिन्दू देवों का नाम दे दिया गया
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़े और नसीरुद्दीन शाह के नेशनल सिनेमा इंस्टिट्यूट से निकले अनुभव उन लोगों में से हैं जिन्हें हिन्दू परंपराओं से घृणा है। वे जब टांग उठाएंगे तो गोबर ही करेंगे।…
लखनऊ का रंग और रुआब
जैसे दिल्ली में इंडिया गेट है। मुंबई में गेट वे आफ इंडिया है। वैसे ही लखनऊ में रूमी दरवाज़ा है। लखनऊ का प्रवेश द्वार।
कोई कुछ भी कहे, कंगना मुझको तो अच्छी लगती हैं!
कंगना जैसी हैं, वैसी क्यों हैं? वो इतनी बदतमीज़ और मुँहफट क्यों हैं? उन्हें इतना ग़ुस्सा क्यों आता है? जब वो आप की अदालत में आईं तो अपनी पैरवी करने का उनका अंदाज़ वैसा ही था, जैसे तनु-मनु…
द मैट्रिक्स ट्रायलॉजी एक हिंदू दर्शन
हिंदू दर्शन अपने समय से आगे का दर्शन है,जिसे समझना हर किसी के बस का नहीं,हिंदुओं के भी बस का नहीं,क्योंकि उन्होंने इस दर्शन को नकार कर,माया को चुना,और माया में भी कर्मशील होने की…