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India
51,508 Gram Panchayats Are Not Having Their Own Building.
Positive India:New Delhi:
As per information, there are 6,62,841 villages in the country. Further, out of 2,71,770 Gram Panchayats (GPs)/ Rural Local Bodies (RLBs) across the country,…
Civil Services (Main) Examination, 2022 – Result Declared
(https://upsconline.nic.in)
https://www.upsc.gov.in & https://www.upsconline.in.
छत्तीसगढ़ में एआरटी व सरोगेसी करने वाले निजी स्वास्थ्य संस्थाओं का पंजीयन प्रारंभ
सरोगेसी एक्ट के तहत सभी आईवीएफ सेंटरों को एक कानूनी प्रक्रिया में बांधा गया है ताकि वे एथिकल प्रेक्टिस कर सकें। एक्ट में प्रावधान है कि ऐसे इनफर्टिलिटी कपल जिनका इलाज प्रक्रियाधीन हैं उनका…
कभी था एम वाई , अब डबल एम फैक्टर है , भाजपा मुक्त भारत का सपना देखने-दिखाने वाला
डबल एम मतलब मुस्लिम और मुफ्तखोर। देश की राजधानी दिल्ली में यह फैक्टर सिर चढ़ कर बोल रहा है। पंजाब में भी इस का जलवा दिखाई दिया बीते चुनाव में। और तो और नरेंद्र मोदी और अमित शाह को चपतियाते…
गोदी मीडिया के बहाने और निशाने
मीडिया का एक ख़ास पॉकेट मोदी का पिट्ठू बन गया है तो इस में अचरज क्या है भला। ब्रिटिश पीरियड से यह परंपरा जैसे भारतीय मीडिया का चलन बन गया है। मीडिया का एक ख़ास पॉकेट तो आज की तारीख में सोनिया…
Breaking:DRDO Hands Over Authority Holding Sealed Particulars of Akash Missile Weapon…
Akash is the first state-of-the-art indigenous surface-to-air missile system which has been with Armed Forces for nearly a decade defending the Indian skies and providing national security.
जब मज़हब भारी हो जाता है तो एक जिन्ना खड़ा हो जाता है और पाकिस्तान पैदा हो जाता है
मुस्लिम समस्या ठीक वैसे ही जैसे जो पाकिस्तान बनते समय थी । वह है मुस्लिम प्रिवलेज । अब धीरे धीरे यह प्रिवलेज फिर से पूरे देश में पांव पसार चुका है ।
प्रसिद्धि ही यदि पैमाना है, तो क्या दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद को भी नमन करना चाहिए?
और तो और, आजकल उर्फी जावेद जितनी प्रसिद्ध है, उतने प्रसिद्ध तो जावेद अख्तर भी नहीं हैं। तो क्या किया जाए?
शर्मनाक! अत्यंत शर्मनाक!!
क्या मनुष्य के सबसे सुंदर अंग उसके पांव ही होते हैं?
स्त्री नख से शिख तक सुन्दर होती है, पुरुष नहीं। पुरुष का सौंदर्य उसके चेहरे पर तब उभरता है जब वह अपने साहस के बल पर विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल कर लेता है।
जेएनयू से ब्राह्मणों के विरोध में उठा सुर एक विमर्श के रूप में क्यो स्थापित हो गया है…
ब्राह्मण का विरोध ब्राह्मणों की एक परीक्षा की तरह भी तो है। बौद्धिकता पर कब्जा है तो इसमें बिना आवेशित हुए सफल होना पड़ेगा। शस्त्र उठाए बिना जीतना पड़ेगा। समाज का संरक्षण करना पड़ेगा।…