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देशप्रेम का प्याला जिसको, पूरे मन से पीना हो
बहकावे में पढ़े लिखे हैं,
बहकावे में हैं आला।
माँ सरस्वती के श्री चरणों में शत शत नमन
भारती की शान पर, शब्द-शब्द वार कर,
वंदे मातरम बोल, मैं निखर जाऊँगा।
झूठ को बचाने लोग, सड़कों पे आ गए।
नेता कुछ ऐसे हैं जो, खादी तो पहनते हैं,
बाँट रहे देश आज, बैरियों को भा गए।
71वें गणतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएँ और बधाई
कैसे इस गणतंत्र की,
पूरी होगी आस।
मुख पे मुखौटे लिए, कई जिन्नावादी हैं।
धरने पे बैठे पर, धरती से प्यार नहीं,
कैद में विचार और, मांगते आजादी हैं।
कौन मेरे सोए हुए, देश को जगायेगा
दे रहे गवाही अब, धूर्त आगे बढ़कर,
सत्य को बचाने कहो, कौन आगे आयेगा।
नागरिकता कानून पर कवियों से एक कवि की अपील
राजहंस बनकर, घूम रहे बगुले भी,
काली करतूत कोई, कैसे जान पाएगा।
कुछ साथी आए थे पीने हाथों में लेकर प्याला
कुछ बैठे थे बंद घरों में ,
पा न सके वो मधुशाला।
Amir Khan Presents Swachhata Darpan Awards
Amir Khan lauded the work done at the grassroots by the officials and shared his experience with initiatives made by Paani Foundation in the area of water conservation.
वही नागरिक घोषित होगा जिसके हाथों में प्याला
रखे तिरंगा सबसे ऊपर,
सदा न्याय की बात करे।
नतमस्तक है उसके आगे,
राही की यह मधुशाला।।