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भारतीय सिनेमा में निर्देशन और महिलायें की भूमिका।

Positive India:रायपुर: भारतीय सिनेमा के निर्देशन क्षेत्र में कदम रखने वाली महिलायें यक़ीनन अलग ही मिज़ाज ,सशक्त और किसी भी विषय पर गहराई से उतरने वाली होंगी। ना जाने उन्हें इस पुरुषसत्ता…

जीती जागती डिवाइस बनती हमारी जिंदगी।

डिवाइस का प्रयोग करते करते हम खुद डिवाइस हो गये ,हमें पता भी नहीं चला।जी हाँ ये इंटरनेट ये सोशल मीडिया ने कब हमारे निजी जिंदगी में सेंध मार कर हमारे सुख चैन ,पारिवारिक संबंधों ,हमारी…

राही की यह मधुशाला: हार जीत पर ठहाके लगाती मधुशाला

Positive India:Rajesh Jain Rahi: जीत हार का आया मौसम, खूब बहेगी फिर हाला। कोई पीकर बेसुध होगा, तोड़ेगा कोई प्याला। कोई साकी से उलझेगा, कोई खंभा नोचेगा। देशभक्त के हिस्से होगी,…

दिग्विजयदास: टुकड़े टुकड़े याद-कनक तिवारी की कलम से

यह कोई महत्वाकांक्षी राजपुरुष की कथा नहीं है। यह तो उसकी त्रासदी की काव्यात्मकता है जो महन्त दिग्विजयदास को किंवदन्तियों के नायक का रुतबा देती है।

माता विमाता-कनक तिवारी की कलम से

‘ढूँढो तुम अपनी माँ को उनकी विमाता की छाती में, जो अपनी अनजायी सन्तान के नासूर का सारा मवाद सुखा देना चाहती थीं। उस विमाता की विवशता में ढूँढो जो बाई को एक औरत की मौत के थोड़े समय बाद ही वही…

ऐ मेरे प्यारे वतन , तुझ पे दिल कुरबान

क्रांतिकारियों के चित्र सरकारी दफ्तरों में क्यों नहीं टांगे जा सकते? क्या वे लोगों में बगावत के शोले सुलगाएंगे? वे असली भारत रत्न हैं। भारत मां की कोख के कोहिनूर हीरे।