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Editorial
हजारी प्रसाद द्विवेदी ने जब एक लड़की से करुण रस के बारे में पूछा तो वह रो पड़ी
Positive India:Dayanand Pandey:
उन दिनों बी ए में पढता था। पर क्लास की पढाई-लिखाई से कहीं ज़्यादा कविता लिखने की धुन सवार थी। धुन क्या जुनून ही सवार था। कवि गोष्ठियों में जाने की लत भी लग…
नोटबंदी के बाद कुछ लेखकों के एन जी ओ को मिलने वाले लाखों , करोड़ों की फंडिंग में ब्रेक…
कुछ लेखकों के एन जी ओ को मिलने वाले लाखों , करोड़ों की फंडिंग में ब्रेक लग गया है । ज़्यादातर सरकारी विदेशी यात्राएं बंद कर दी गई हैं । तीन यात्राएं तो मेरी ही रद्द हो गईं । बारी-बारी । दो बार…
गुजरात में सारे एग्जिट पोल, ओपिनियन पोल क्यो धरे के धरे रह गए?
बिलकिस बानो, मोरबी, किसान, महंगाई, अदानी-अंबानी कोई भी गुजरात में भुनाया न जा सका। दरअसल ये मुद्दे विपक्षियों के लिए उल्टा प्रहार सिद्ध हुए। बिलकिस बानो का राजनीति में इस्तेमाल गुजरात ने…
अरबों-खरबों वाले आई ए एस अफ़सर
आई ए एस अफसरों के एक वर्ग ने अखंड प्रताप सिंह को फिर भी महाभ्रष्ट घोषित किया । सी बी आई के फंदे में आ कर वह जेल भी गए । लेकिन वह घर उन का आज भी सही सलामत है । उन के तमाम फार्म हाऊस भी । जहां…
कभी था एम वाई , अब डबल एम फैक्टर है , भाजपा मुक्त भारत का सपना देखने-दिखाने वाला
डबल एम मतलब मुस्लिम और मुफ्तखोर। देश की राजधानी दिल्ली में यह फैक्टर सिर चढ़ कर बोल रहा है। पंजाब में भी इस का जलवा दिखाई दिया बीते चुनाव में। और तो और नरेंद्र मोदी और अमित शाह को चपतियाते…
गोदी मीडिया के बहाने और निशाने
मीडिया का एक ख़ास पॉकेट मोदी का पिट्ठू बन गया है तो इस में अचरज क्या है भला। ब्रिटिश पीरियड से यह परंपरा जैसे भारतीय मीडिया का चलन बन गया है। मीडिया का एक ख़ास पॉकेट तो आज की तारीख में सोनिया…
जब मज़हब भारी हो जाता है तो एक जिन्ना खड़ा हो जाता है और पाकिस्तान पैदा हो जाता है
मुस्लिम समस्या ठीक वैसे ही जैसे जो पाकिस्तान बनते समय थी । वह है मुस्लिम प्रिवलेज । अब धीरे धीरे यह प्रिवलेज फिर से पूरे देश में पांव पसार चुका है ।
प्रसिद्धि ही यदि पैमाना है, तो क्या दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद को भी नमन करना चाहिए?
और तो और, आजकल उर्फी जावेद जितनी प्रसिद्ध है, उतने प्रसिद्ध तो जावेद अख्तर भी नहीं हैं। तो क्या किया जाए?
शर्मनाक! अत्यंत शर्मनाक!!
क्या मनुष्य के सबसे सुंदर अंग उसके पांव ही होते हैं?
स्त्री नख से शिख तक सुन्दर होती है, पुरुष नहीं। पुरुष का सौंदर्य उसके चेहरे पर तब उभरता है जब वह अपने साहस के बल पर विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल कर लेता है।
जेएनयू से ब्राह्मणों के विरोध में उठा सुर एक विमर्श के रूप में क्यो स्थापित हो गया है…
ब्राह्मण का विरोध ब्राह्मणों की एक परीक्षा की तरह भी तो है। बौद्धिकता पर कब्जा है तो इसमें बिना आवेशित हुए सफल होना पड़ेगा। शस्त्र उठाए बिना जीतना पड़ेगा। समाज का संरक्षण करना पड़ेगा।…