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Editorial
आप के रोल माडल आखिर बिन लादेन , बगदादी , बुरहान वानी या ज़ाकिर नाईक जैसे हरामखोर…
ब्रिटिशर्स यहां व्यापारी बन कर आए थे लेकिन मुगल तो सीधे-सीध आक्रमणकारी बन कर आए थे । सोने की चिड़िया को लूट लिया । जाने कितने मंदिर लूटे और तोड़े बारंबार । समृद्धि , सुख-चैन लूट लिया । उन का…
लेखक ,लेखिका और पत्रकार लिव इन रिलेशनशिप को लीचड़ और गलीज परम्परा क्यों करार देते…
लेखक बोलने के लिए जाने जाते हैं। कोई उनका गमछा छू देता है तो आंदोलन कर देते हैं। उनकी बाइक के आगे गड्ढा आ जाता है तो वहीं गमछा बिछा कर आंदोलन पर बैठ जाते हैं। और जब आपके ऊपर इतना बड़ा आरोप…
सोचिए एंडरसन ने कैसे पहले से शॉर्टसेल में लाखों शेयर बेच कर रिपोर्ट उछाली होगी फिर…
बिना किसी लागत के दुनिया भर की कम्पनियों की कमज़ोरियों पर नज़र रख कर ही कितना पैसा कमाया जा सकता है एंडरसन इसके उदाहरण है ।
पूजिय विप्र सकल गुन हीना
सनातन धर्म का परमात्मा तो घट घट वासी है । तुलसी कहते हैं “सीय राम मय सब जग जानी । करहुँ प्रनाम जोरि जुग पानी” क्या शूद्र क्या ब्राह्मण !
मजबूरी का नाम महात्मा गांधी
गांधी के सत्य का राम नाम सत्य करते गांधी के असली दुश्मन असल में कांग्रेस में ही बैठे थे। धीरे-धीरे गांधी इतने लाचार हो गए कि एक मुहावरा ही बन गया कि मजबूरी का नाम महात्मा गांधी।
श्रीरामचरित मानस को जलाने वालो का वंश समूल नष्ट होगा क्यो होगा?
याद करिये जिन्होने प्रभू के अस्तित्व से लेकर राम सेतु तक को मानने से इंकार किया था....जिन्होने भगवा आतंकवाद की कहानी गढ़ी थी....या जिसने भी हमारे अराध्य और हमारी अस्मिता पर सवाल उठाये…
लखनऊ में कौन वाली रामचरितमानस जलाई गई है!
Positive India:Bodhisatva:
आज लखनऊ में तुलसीदास कृत रामचरितमानस को जलाए जाने की एक क्षोभ कारी घटना हुई है। तो उस संदर्भ में बताना है कि मेरे निजी संग्रह में गोस्वामी तुलसीदास विरचित…
कमलेश्वर अभी ज़िंदा हैं
कमलेश्वर ने न सिर्फ़ कहानी के मोर्चे पर बल्कि वैचारिक स्तर पर भी खास कर धर्मनिरपेक्षता के मामले पर भी काफी काम किया। और मोर्चा लेना तो उन का जैसे शगल ही था। उन की आवाज़ में जो खनक हमेशा समाई…
क्या आप आस्था बनाम प्रमाण का फर्क जानना चाहते है?
जब कोई धीरेंद्र शास्त्री जैसा व्यक्ति सामने आता है तो मन दुविधा में पड़ जाता है। प्रमाण की बातें छोड़कर आस्था के सामने नतमस्तक हो जाना पड़ता है। इसलिए हर बात में यदि हम प्रमाण चाहते हैं तो…
एनजीओ चलाने वाले अधिकांश वामपंथी लेखक ऐक्टिविस्ट क्यो बन गए?
कभी मानव संसाधन मंत्री रहे अर्जुन सिंह ने इन लोगों के एन जी ओ को विपुल धनराशि दे-दे कर इन की आदतें बिगाड़ दीं । मनबढ़ बना दिया। कहूं कि अपना कुत्ता बना लिया। यह एन जी ओ अनुदान का काकस मोदी राज…