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Editorial

कटी पतंग की कैफ़ियत

दिल्ली में काकरोच जनता पार्टी , सोनम वांगचुक और इस बहाने अनेक रंग बिरंगे साँप मोदी सरकार के हाथ लग गए हैं । अब कटी पतंगों को उड़ते और गिरते हुए देखने का लुत्फ उठाने का समय आ गया है ।

नकटी के सवाल और सरकार

नकटी प्रकरण ने भारतीय जनता पार्टी के अंतर्विरोध को भी उजागर कर दिया है. यह स्पष्ट हो गया सांसद बृजमोहन अग्रवाल के प्रति साय सरकार का रूख मित्रतापूर्ण नहीं है.

प्रतिभाहीन रेगिस्तान !

अब तो आलम यह है कि 96 प्रतिशत पर भी आप को विश्वविद्यालय में एडमिशन ही नहीं मिलता जब कि पचास प्रतिशत वाले को धड़ल्ले से एडमिशन मिल जाता है । तब पढ़ेगा भी कौन इस देश में ।

तस्लीमा नसरीन:सत्ता बदलने से बहुत कुछ बदलता है

तस्लीमा नसरीन ने अपने देश बंगलादेश में हिंदुओं पर होने वाले अत्याचार पर एक किताब क्या लिख दी, भारतीय बुद्धिजीवियों की सटक गई। हम उसको बोंगाल में नोहीं घुसने डेगा...

आरक्षण अब नासूर बन गया है l कैंसर और एड्स से भी ज़्यादा ख़तरनाक

क्या सचमुच अंबेडकर संविधान निर्माता है ? अकेले ? 319 सदस्यों वाली संविधान सभा थी । इस संविधान सभा के अध्यक्ष थे राजेंद्र प्रसाद । वी एन राव सलाहकार । अंबेडकर सिर्फ़ एक ड्राफ्ट कमेटी का…

कर्ण द्वापर में ही नहीं कलयुग में भी होते हैं कभी कुंती के हिस्से , कभी मुलायम के…

ग़नीमत बस यही थी कि अपर्णा आसाम में थीं। लखनऊ में नहीं। अपर्णा अगर लखनऊ में होतीं तो सपा के लोग उन को फंसाने के लिए , लांछन लगाने के लिए कुछ भी कर गुज़र गए होते।