Browsing Category
Editorial
अगर तुलना करनी ही है आज़म खान की तो औरंगज़ेब से ज़रूर कर सकते हैं
रामपुर की यूनिवर्सिटी आज़म खान के अवैध पैसे से ही बनी। कितने गरीब मुसलमानों की ज़मीन हड़पी है आज़म खान ने ।
रामपुर में तमाम दलितों का इस्लाम में धर्मांतरण करवाने का अपराधी है आज़म खान।
ओवैसी…
रद्द होती परीक्षाओं की पीड़ा…
नीतीश बाबू, जिसने बीपीएससी का पेपर लीक किया है उसे केवल सस्पेंड कर के क्या बिगाड़ लेंगे आप? एक साल में दुबारा ज्वाइन कर लेगा वह। होना तो यह चाहिये था कि आप उस पूरे सिस्टम को बर्खास्त करते,…
परमाणु परीक्षण के बहाने और निशाने श्रीलंका के रास्ते पर भारत नहीं , पाकिस्तान चल पड़ा…
विपक्ष की मनोकामना है कि भारत में भी श्रीलंका वाली आगजनी हो। मोदी फूंक दिया जाए। भूल जाते हैं यह मनोकामना करते हुए कि श्रीलंका , चीन का उपनिवेश बन चुका है। सब कुछ चीन करवा रहा है श्रीलंका…
तो भीलवाड़ा में आदर्श भी मारा गया
पर धर्मनिरपेक्ष सरकारें इन हत्याओं पर आंखें मूंदें हुए हैं. तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवियों को ये मॉब लिंचिंग नज़र नही आती।
वह घुंघराले बाल और संतूर की मिठास ! आह !
पंडित शिव कुमार शर्मा का संगीत तो अमर है , सर्वदा रहेगा। मेरे मन में भी। मेरे लिखने में भी पंडित शिव कुमार शर्मा का संतूर बजता ही रहेगा। बस वही नहीं रहेंगे।
हमारे समाज के लेखक का कबीर आख़िर कहां गुम हो गया है ?
मीडिया को हमारा समाज अब दलाल नाम से जानता है । क्या आप लोग चाहते हैं कि आने वाले दिनों में मीडिया की तरह लेखक समाज को भी दलाल कह कर , जाना जाए ? माफ़ कीजिए हमारे आदरणीय लेखक मित्रों आज के दिन…
देश को अब चाहिए योगी जैसा एक सबल और प्रभावी गृह मंत्री
अमित शाह जैसा निर्बल और नाकारा गृह मंत्री देश नहीं चाहता। कभी एक मोहम्मद ताहिर , कभी एक अमानतुल्लाह अमित शाह को भरी दिल्ली में पानी पिला देता है।
‘आप’ की दस्तक के मायने
प्रदेश में आप का सांगठनिक ढांचा बहुत कमजोर है। बौद्धिक वर्ग में भी उसका असर नहीं है जबकि यह उन्हीं की पार्टी कहलाती है। अपने अस्त-व्यस्त पार्टी के सांगठनिक ढांचे को नये सिरे से खडा करने के…
नाम ज्ञानवापी और मस्जिद ! चौंके नही आप ?
ज्ञानवापी कोई मस्जिद नही बल्कि हिंदू मंदिर पर बना एक कलंक है,बाकी वहां अपने महादेव की ओर मुख करके महादेव की प्रतीक्षा करते बैठे नंदी महाराज सारी सच्चाई स्वयं बता दे रहे हैं।
अम्मा के नीलकंठ विषपायी होने की अनंत कथा
मुनव्वर राना का यह शेर मेरी ज़िंदगी में भी बेहिसाब घटा है। कि अब क्या कहूं।
इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है ।
बल्कि वह तो गुस्सा ही नहीं…