
चुनाव हारने के बाद भी ममता के गुंडे लगातार हत्याएं कर रहे हैं
-सर्वेश कुमार तिवारी की कलम से-

Positive India: Sarvesh Kumar Tiwari:
जनता जो कर सकती थी, जितना कर सकती थी, कर चुकी। आपके लिए जितना लड़ सकती थी, उतना लड़ कर आपको विजय दिला दिया। आपको इतनी बड़ी और शानदार जीत दिलाई गई है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अब उनका काम पूरा हुआ, यहाँ से आपकी ड्यूटी शुरू होती है।
चुनाव हारने के बाद भी गुंडे जिस तरह लगातार हत्याएं कर रहे हैं, उसे देख सुन कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सत्ता रहते हुए उनलोगों ने आम जनता को कितने दबाव, कितने भय में रखा होगा। उस भय को किनारे करते हुए लोग जिस तरह आपके साथ खड़े हुए, आपके लिए मतदान केंद्र पर पहुंचे, वह अद्भुत है। यकीनन लोग अपनी जान पर खेल रहे थे। धमकियां तो दी ही जा रही थीं। यदि उनका बड़ा नेता देश के गृह मंत्री को रुकने की धमकी दे रहा था, फिर सोचिए कि गांव देहात के सामान्य जन को किस तरह धमकाया गया होगा। फिर भी लोग आपके साथ खड़े हुए…
माना कि लोग स्वयं के लिए ही लड़ रहे थे, अपनी सुरक्षा, अपने विकास, अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे थे, पर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती प्रजा यदि आपके ऊपर भरोसा करती है तो यह कम गौरव की बात नहीं। आपकी जीत वस्तुतः उनके भरोसे की जीत है… अब उस भरोसे की रक्षा करने का समय है।
बंगाल में जो हो रहा है, वह कम भयावह नहीं। भावी मुख्यमंत्री माने जा रहे, सबसे प्रभावशाली नेता के पीए की हत्या कोई सामान्य घटना नहीं। नव निर्वाचित विधायक के भाई की हत्या कोई सामान्य घटना नहीं। आप कल्पना कर सकते हैं कि ऐसी घटनाएं आम लोगों को किस तरह डरा रही होंगी। आपकी पहली ड्यूटी है कि उस भय को दूर कीजिए… विकास, कम्पनी, पुल, सड़कें सब बाद की बातें होंगी…
आमलोग नाचते गाते अपने तीर्थस्थलों तक जा रहे हैं। हर गांव में उत्सव का माहौल है। स्त्रियां मंदिर धो रही हैं, पुरुष खोल बजा रहे हैं, बंगाल कीर्तन गा रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें गुलामी से मुक्ति मिली हो… इस देश में हर साल चुनाव होते हैं, पार्टियां हारती जीतती हैं, सरकारें बनती बिगड़ती हैं, पर ऐसा उल्लास तो कहीं नहीं होता… इस उल्लास का कारण कौन नहीं समझता?
यह उल्लास, आम जन के मन में उछल रहा विजय का हर्ष फिर भय में नहीं बदलना चाहिए। यदि आप उनकी सुरक्षा नहीं कर सके तो उन्हें मजबूरन फिर पलटी मार देना होगा… और फिर यह उल्लास भविष्य में शायद ही उन लोगों के हिस्से आए।
बंगाल के अपराधियों को इतना कठोर दण्ड मिलना चाहिए कि उदाहरण बन जाय। उसे आप बदला कहें या बदलाव, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आवश्यक है कि गुंडों की कमर टूटे… उन्हें उत्तर प्रदेश जैसी सरकार चाहिए, जिसका मुखिया सदन में गरज कर कहे कि माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे… मिलाइए मिट्टी में उन लोगों को, जो चुनाव हारने के बाद भी हत्याएं करा रहे हैं। आपका विजयी होना तभी चरितार्थ होगा…
साभार: सर्वेश कुमार तिवारी -(में लेखक के अपने विचार हैं)