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लालबहादुर शास्त्री जी के योगदान को आज साधारण करके आँका जा रहा है

-राजकमल गोस्वामी की कलम से-

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Positive India: Rajkamal Goswami:
फेसबुक पर ही कहीं पढ़ा कि शास्त्री जी बस ईमानदार भर थे प्रधानमंत्री बस साधारण थे ।

लालबहादुर शास्त्री जी के योगदान को आज अगर साधारण करके आँका जा रहा है तो यह सरकार और भारतीय दृश्य और प्रिंट मीडिया के साथ जनता की जिज्ञासा का भी दोष है कि वे शास्त्री जी के योगदान को नहीं जानते और उनके प्रति कृतज्ञ भी नहीं हैं । अपने छोटे से कार्यकाल में वे जो कर गये वह असाधारण है ।

आज जो भी हरित क्रांति दुग्ध क्रांति ( ऑपरेशन फ्लड ) और यहाँ तक कि फसलों की एमएसपी तक जो दिखाई दे रही है उसके जनक शास्त्री जी ही थे । उन्हीं के इनीशियेटिव से सी सुब्रह्मण्यम और एमएस स्वामीनाथन ने नये उपकरणों से आधुनिक खेती की नींव रखी । भारी उपज देने वाले मैक्सिकन गेहूँ की खेती शुरू की गई ।

एलके झा के नेतृत्व में झा कमेटी गठित की गई जिसे फसलों के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने का काम दिया गया ताकि उचित मूल्य पर खरीद की व्यवस्था कर किसानों को आधुनिक खेती की तरफ आकर्षित किया जा सके ।

आणंद में वर्गीज कुरियन की अध्यक्षता में नेशनल डेरी डवलेपमेंट बोर्ड का गठन किया गया । जिसने दुग्ध क्रांति के जरिये सन १९९८ में अमेरिका को पछाड़ कर भारत को दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बना दिया । देश को खाद्यान्न संकट से उबार कर खाद्यान्न निर्यातक देश बनने की दिशा में मोड़ दिया ।

आज घर घर अमूल पहुँच रहा है और अनाज के गोदाम भरे पड़े हैं । शास्त्री जी को पता था इसलिये फूड कॉर्पोरेशन की स्थापना उन्होंने पहले की कि इतना अनाज होगा तो उसको गोदामों में संरक्षित करने की व्यवस्था तो कर ली जाये ।

कृतज्ञ भारतवासी का नमन ।

साभार:राजकमल गोस्वामी

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