

पॉजिटिव इंडिया: रायपुर 23अगस्त,
*गजेन्द्र साहू दृवारा विशेष*

ये वाक्या रायपुर के प्रतिष्ठित साईंस कॉलेज का है । समय का सही ज्ञान नहीं पर घटना सत्य है । BSC की कक्षा का पंखा अचानक ख़राब हुआ । सभी छात्रो ने ख़राब पंखे के साथ समझौता करने का मन बना लिया पर कोई था जिसे समझौता नहीं समाधान चाहिए था । तब वह सामान्य छात्र कक्षा के खराब पंखे की शिकायत जब अपने शिक्षकों से करता है तो उसकी सुनवाई नहीं होती । बाद में वही शिकायत प्रिन्सिपल की टेबल तक पहुँचतीं है फिर भी कोई सुधार व जवाब नहीं मिलता । फिर अचानक एक दिन वह अपने साथियों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना दे देता है । अचानक वह धरना आंदोलन का रूप ले लेता है जिसे शांत करने के लिए स्वयं कलेक्टेर को आना पड़ता है । छात्र की माँग सुन कर कलेक्टेर साहब भी चौक गए और तुरंत पंखा को ठीक कराने का आदेश दिया । तब किसने सोचा था कि पंखा की लड़ाई सड़क पर लड़ने वाला एक दिन सत्ता की लड़ाई के सिंहासन तक पहुँचेगा ।
जी हाँ । वह सामान्य छात्र कोई और नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी है ।
भूपेश जी की राजनीतिक शुरुआत दुर्ग युवा कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष से हुई। उनके राजनीतिक गुरु चंदू लाल चंद्राकर जी ने उन्हें हमेशा सहयोग किया । 1993 में पहली बार विधायक बने और ये क्रम लगातार तीन बार चला । इस बीच वे म.प्र. व छ.ग. शासन में मंत्री पद की ज़िम्मेदारियों का निर्वहन भी कर चुके है। सन 2008 में पहली बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा । इंसान कुछ चीज़ें हार कर ही सिखता है इसे बघेल जी ने सबित भी किया । हारने के बाद जीतकर भूपेश जी दुगनी तेज़ी से राजनीति पटल पर ऊपर गए ।
झीरम नक्सल हिंसा के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के चले जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस की बागडोर भूपेश बघेल जी के हाथो में आई । १० साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस का मनोबल और विश्वास टूट चुका था । बघेल जी ने अपने नेतृत्व में कांग्रेस को वापस खड़ा किया । अपनी अक्रमक़ छवि के अनुरूप उन्होंने विपक्ष में रहते हुए सरकार को दाँतो तले ऊँगली चबवा दी। कांग्रेस के बड़े कार्यकर्ताओं से लेकर अंतिम कार्यकर्ता तक वे लगातार संवाद करते रहे । उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं , पदाधिकारियों और पार्टी में नया जोश भर दिया ।विधानसभा से लेकर सड़क तक जनता की लड़ाई लड़ी । इस बीच उन पर कई प्रकार के आरोप लगे । जेल तक जाना पड़ा । पर बघेल जी तस के मस न हुए । आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनाव हुए । कांग्रेस ने एतिहासिक जीत दर्ज की । और भूपेश बघेल को इनाम स्वरूप मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली ।
मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने जनता से किए वादे पूरे करने शुरू कर दिए । “नायक “फ़िल्म के मुख्यमंत्री की तरह लगातार फ़ैसले व घोषणाओं से बघेल जी ने जनता का दिल जीत लिया । छत्तीसगढ़ राज्य बनने के १९ वर्ष बाद लोगों को ये एहसास हुआ कि वे छत्तीसगढ़ राज्य में रहते है और यहाँ छत्तीसगढ़ियाँ लोगों की छत्तीसगढ़ी सरकार है । बघेल जी ने विलुप्त की कगार पर खड़े छत्तीसगढ़ के संस्कृति , परंपरा , व्यंजन , भाषा , जाति-जनजाति ,धरोहर को पुनः जीवित कर दिया है । आज हर छत्तीसगढ़ी त्योहार को गर्व से मनाया जाता है । छत्तीसगढ़ी त्योहार को मनाने के लिए शासकीय अवकाश दिया जाता है । किसान पुत्र होने के कारण उनका किसानो के प्रति विकास की झलक साफ़ दिखाई पड़ती है ।
छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री जी को जन्मदिन की बधाई व शुभकामनाएँ । आप ऐसे ही छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों के उत्थान के लिए कार्य करते रहे ।