
यूजीसी के कारण मोदी जी वीपी सिंह की गति को और भाजपा जनता दल की गति को प्राप्त हो जायेगी
-राजकमल गोस्वामी की कलम से-

Positive India: Rajkamal Goswami:
पठानकोट हवाई अड्डा जिसमें आम आदमी का प्रवेश वर्जित है उसमें पाकिस्तानी अफसरों को घुसा कर निरीक्षण करवाने के मोदी सरकार के निर्णय से आतंकवाद के विरुद्ध हमारी लड़ाई को क्या लाभ हुआ ?
अमेरिकी चुनावों में ट्रम्प का हाथ पकड़ कर ऊपर करके अबकी बार ट्रम्प सरकार का नारा देना हमारी विदेश नीति के पतन का सबसे निचला बिन्दु था । एक विदेशी सरकार के मुखिया को वहाँ के आम चुनाव में सीधा समर्थन किस तरह की विदेश नीति है ।
२०२४ के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प ने सार्वजनिक घोषणा कर दी थी कि मेरे मित्र मोदी आ रहे हैं मुझसे मिलने तब मोदी जी ने अपने एक मामूली कर्मचारी से मना करवा दिया कि टाइम नहीं है, आप व्यक्तिगत रूप से फोन भी कर सकते थे । नतीजा ट्रम्प चिढ़ भी गया और जीत भी गया । तभी से भारत को हर तरह से दुखी कर रहा है ।
२ अप्रैल २०१८ को एक दिन के छोटे से आंदोलन से डर कर आपने एसएसी एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलट कर शाह बानो की याद दिला दी । राजीव गाँधी ने तब भी शाह बानो पर संसद में बहस कराई थी आपने तो बिना विचारे संशोधन कर दिया और सवर्ण हित को गहरी चोट पहुँचाई । आज दशा यह है कि कोई सवर्ण अधिकारी अपने अधीनस्थ एससी अफसर को प्रतिकूल प्रविष्टि तक नहीं दे सकता ।
किसान आंदोलन के दबाव में कानून वापस ले लेने से यह संदेश गया कि सरकार लात खा कर काम करती है और इसे दबाने के लिए एक ठीक ठाक आंदोलन की जरूरत है बस ।
भाजपा को कभी जातिवादी पार्टी हमने नहीं समझा हाँ समग्र रूप से हिंदुओं की हित चिंतक पार्टी थी । जातिवादी कांग्रेस भी नहीं थी । एक चुनाव में उसका नारा था “जात पर न पात पर मुहर लगेगी हाथ पर” और कांग्रेस वह चुनाव जीती । भारत का सामान्य वोटर भी जात पात के मुकाबले देशहित को महत्व देता था । जाति की राजनीति तो मंडल आयोग के बाद शुरू हुई । भाजपा तब भी समग्र हिंदू हित की राजनीति करती रही । जातिवादियों ने उप्र में सपा बसपा की मिली जुली सरकार बनाई जो स्टेट गेस्ट हाउस में मायावती पर सपाइयों के आक्रमण के बाद टूट गई । जातिवादी पार्टियों के कटु अनुभव के बाद उप्र में २०१७ में भाजपा की सरकार आई हलाँकि इसमें इसमें केंद्र की कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टीकरण का भी बड़ा हाथ रहा ।
मुसलमानों के ख़िलाफ़ भड़काने और मौका पड़ने पर अपने कार्यकर्ता को असहाय छोड़ देने का उदाहरण नूपुर शर्मा का है । नूपुर शर्मा की जगह कोई मुसलमान महिला होती तो मुसलमान सत्ता में आने पर उसे मुख्यमंत्री बनाते इस तरह छुपाये छुपाये न घूम रहे होते । मामूली से अरब देश क़तर की घुड़की से आप डर गये ।
अब आपने ओबीसी वोटों के लालच में ओबीसी और दलितों को यूजीसी में एक प्लेटफार्म पर लाकर खड़ा कर दिया । भेड़ और भेड़िया दोनों शोषित वर्ग हो गये । दबंगई में सबसे कमजोर कायस्थ और ब्राह्मण शोषक वर्ग बना कर पेश कर दिये ।
ठीक है जो आपको करना था वह कर चुके । अब फैसला चुनाव के मैदान में ही होगा । मोदी जी वीपी सिंह की गति को और भाजपा जनता दल की गति को प्राप्त हो जायेगी । एक योगी हैं जो संकटमोचक हो सकते हैं अगर भाजपा अपना नेतृत्व उन्हें सौंप दे ।
जय श्री राम
साभार:राजकमल गोस्वामी-(में लेखक के अपने विचार हैं)