रावण की स्त्रियों के बारे क्या सोच थी वह रावण की ही थी तुलसी की नहीं
नारियाँ स्वतंत्र होकर बिगड़ जाती हैं । यद्यपि यह बात तुलसीदास ने चार सौ वर्ष पहले कही थी जब युग ही दूसरा था लेकिन आज भी जिस तरह स्त्रियाँ कभी सूटकेस में कभी तंदूर में कभी प्लास्टिक बैग में…