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लखनऊ का रंग और रुआब

जैसे दिल्ली में इंडिया गेट है। मुंबई में गेट वे आफ इंडिया है। वैसे ही लखनऊ में रूमी दरवाज़ा है। लखनऊ का प्रवेश द्वार।

कोई कुछ भी कहे, कंगना मुझको तो अच्छी लगती हैं!

कंगना जैसी हैं, वैसी क्यों हैं? वो इतनी बदतमीज़ और मुँहफट क्यों हैं? उन्हें इतना ग़ुस्सा क्यों आता है? जब वो आप की अदालत में आईं तो अपनी पैरवी करने का उनका अंदाज़ वैसा ही था, जैसे तनु-मनु…

दो दो ओलंपिक गोल्ड जीतने वाली अवनी के साथ साथ देश को भी बधाई।

ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली अवनी जैसी लड़कियां हर समाज की जरूरत हैं। विपत्ति के मारे लोगों को अवनी जैसी लड़कियों की कहानी नया जीवन देती है। ऐसी कहानियां कही-सुनी जानी चाहिये। अवनी…

द मैट्रिक्स ट्रायलॉजी एक हिंदू दर्शन

हिंदू दर्शन अपने समय से आगे का दर्शन है,जिसे समझना हर किसी के बस का नहीं,हिंदुओं के भी बस का नहीं,क्योंकि उन्होंने इस दर्शन को नकार कर,माया को चुना,और माया में भी कर्मशील होने की…

साधु जैसे दिखने वाले बलराम बोस ममता के अत्याचार के विरुद्ध मुखर प्रतिरोध के प्रतीक बन…

बलराम बोस बताते हैं कि उन्होंने प्रशासन को इशारे से कहा कि सत्ता की गुलामी से मुक्त हो कर तनिक मनुष्य की भांति भी सोच लो। तुम्हारे घरों में भी बेटियां हैं, तुम्हे हमारे साथ खड़ा होना चाहिए।

कृष्ण अभी तक सबसे ज्यादा माने जाने के पश्चात सबसे कम समझे जाने वाले भगवान हैं

कृष्ण का दर्शन ही मेरे देखे '''' सहज मार्ग ''' है .... उन्होने अपनी चेतना को किसी भी बंधन में नहीं रखा ,,,, उन्होने परमात्मा को धर्म के नियमों के छाते के नीचे आकार देखने की बजाय ,,,,, खुले…

दुनिया बहुत बड़ी है, अपने दिमाग़ को खोलो, उसको बेमाप विस्तार दो।

हिन्दी के इतने बड़े कवि के लिए आचार्य शंकर का कोई अस्तित्व क्यों नहीं? अद्वैत-वेदान्त से उसे कोई लेना-देना क्यों नहीं?

मुस्लिम समाज और वामपंथी समाज जितना कट्टरपंथी कोई और समाज नहीं है

पढ़े-लिखे जाहिल भी भारत माता की जय बोलना अपराध समझते हैं । भारत माता की जय बोलने वालों को अस्पृश्य समझते हैं । इन जाहिल और जंपट लोगों को वंदे मातरम ही नहीं जन गण मन गाने में भी अपराध दीखता…