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#editorial

सम्भल में जो दिख रहा है वह किसी छोटे पराजय से हुए नुकसान की भरपाई है।

पलायन वाली घटना की फाइल बाबा फिर खोल रहे हैं। कुंए की खुदाई चल रही है। आगे देखते हैं कि समय क्या खेल दिखाता है।

भारतीय भ्रष्ट ज्यूडिशरी सिस्टम उस जज के समान है जो अतुल को बर्बाद कर बीवी के नाजायज…

हिंदुस्तान उनके बाप का नहीं था, न अब है। लेकिन आज भी मुस्लिम समाज की दादागिरी और धौंस देखिए, आधी भूमि हड़पकर भी बिल्कुल अतुल की बीवी जैसा आचरण है

अतुल सुभाष की आत्महत्या कानून के दायरे में होने वाली प्रताड़ना और अत्याचार का मुद्दा…

आदमी जब पीड़ित होता है तो कोर्ट की शरण में जाता है। जब कोर्ट ही अन्याय करने लगे, पीड़ा देने लगे तो कहाँ जाय?

कुछ बाते कभी भूली नहीं जानी चाहिए

Positive India:Sarvesh Kumar Tiwari: हमें याद रहना चाहिए कि सन 1528 में एक क्रूर, असभ्य, अभद्र आतंकवादी ने अयोध्या में महाराज विजयचन्द( कन्नौज नरेश जयचंद के पिता! मन्दिर जयचन्द की…

अब दिल्ली की चुनौती

दिल्ली चुनाव के संदर्भ में सबसे खराब स्थिति कांग्रेस की रही है. हरियाणा के बाद महाराष्ट्र में भी भीषण पराजय से दिल्ली पुन: दूर नज़र आने लगी है ।

स्मिता पाटिल अपनी कई फ़िल्मों की अन्तिम फ्रेम में वे अकेली ही खड़ी नज़र आती हैं!

रुपहला सौंदर्य, गौर वर्ण और प्रचलित नैन-नक़्श स्मिता के पास नहीं, लेकिन एक सँवलाया हुआ-सा खिंचाव है, क़शिश है, लगभग आत्मघाती आकर्षण है।

बड़े भाई साहब:ख्यातनाम पत्रकार व कवि श्री ललित सुरजन जी की चौथी पुण्य तिथि पर विशेष…

क्या कारण है कि ललित जी जैसा समर्थ पत्रकार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय का कुलपति नहीं बन सका जबकि उसकी स्थापना हुए पन्द्रह वर्ष बीत चुके हैं। देश के बहुत बडे कवि व उपन्यासकार…