सिकन्दर से अब्दाली तक हर बार क्रूरता की नई परिभाषाएं देखी लोगों ने, छील दिए गए चमड़े के ऊपर नमक का लेप स्वीकार किया, रस्सियों में बंध कर पशुवत जीवन स्वीकार किया, पर स्वाभिमान त्यागना स्वीकार…
जो योगेंद्र सलीम यादव ncert की बुक्स में लिखवाता है कि औरंगजेब टोपियां सिल कर गुजारा करता था, जो इरफ़ान हबीब बताता है कि वह तो दानी था, जो रोमिला आंटी आज भी मुगलों की याद में मल्टीपल ऑर्गेज़म…
अभिनय की बात करें तो अभिषेक शीर्ष पर हैं। एक अति आत्मविश्वास वाला व्यक्ति, जिसे एक दिन पता चलता है कि उसे केंसर है और उसके पास केवल सौ दिन बचे हैं। वह भी तब, जब उसके पास परिवार के नाम पर…
तुम्हारे मंदिरों की मूर्तियों को तोड़ा जा रहा,तुम्हारे मंदिरों के प्रसाद को गौ मांस की चर्बी वाले घी से बनाया जा रहा,तुम्हारे खाने में थूका और जूस में मूत्र मिलाया जा रहा,तुम्हारी बेटियों की…
Positive India: Dayanand Pandey:
किसी के दिल को लुभाना हो, दुलराना हो या फ़िर दिल की या किसी भी तकलीफ़ की तफ़सील मे जाना हो लता मंगेशकर कि आवाज हर मोड़ पर मुफ़ीद जान पड़ती है। राज्य सभा में…
कंगना जैसी हैं, वैसी क्यों हैं? वो इतनी बदतमीज़ और मुँहफट क्यों हैं? उन्हें इतना ग़ुस्सा क्यों आता है? जब वो आप की अदालत में आईं तो अपनी पैरवी करने का उनका अंदाज़ वैसा ही था, जैसे तनु-मनु…