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कामरेड समरेश बसु और फ़िल्मकार विमल रॉय का अमृत कुंभ !

अरे कुंभ नहीं पसंद है , कोई बात नहीं । गोली मारिए , कुंभ को । पर नाग बन कर , फ़न काढ़ कर , नित्य प्रति , क्षण -क्षण खड़े रहना इतना ज़रूरी है ?

छावा: चालीस दिनों तक तड़पाने के बाद शम्भू जी और कवि कलस के शरीर को टुकड़ों में काटा…

सिकन्दर से अब्दाली तक हर बार क्रूरता की नई परिभाषाएं देखी लोगों ने, छील दिए गए चमड़े के ऊपर नमक का लेप स्वीकार किया, रस्सियों में बंध कर पशुवत जीवन स्वीकार किया, पर स्वाभिमान त्यागना स्वीकार…

Chhava में छत्रपति शम्भाजी महाराज पर दर्शाए अत्याचार अतिरंजना नहीं, सच्चाई है।

जो योगेंद्र सलीम यादव ncert की बुक्स में लिखवाता है कि औरंगजेब टोपियां सिल कर गुजारा करता था, जो इरफ़ान हबीब बताता है कि वह तो दानी था, जो रोमिला आंटी आज भी मुगलों की याद में मल्टीपल ऑर्गेज़म…

स्मिता पाटिल अपनी कई फ़िल्मों की अन्तिम फ्रेम में वे अकेली ही खड़ी नज़र आती हैं!

रुपहला सौंदर्य, गौर वर्ण और प्रचलित नैन-नक़्श स्मिता के पास नहीं, लेकिन एक सँवलाया हुआ-सा खिंचाव है, क़शिश है, लगभग आत्मघाती आकर्षण है।

बकवास फिल्मों के दौर में अच्छी फिल्म देखना हैं तो अभिषेक की आई वांट टू टॉक देख…

अभिनय की बात करें तो अभिषेक शीर्ष पर हैं। एक अति आत्मविश्वास वाला व्यक्ति, जिसे एक दिन पता चलता है कि उसे केंसर है और उसके पास केवल सौ दिन बचे हैं। वह भी तब, जब उसके पास परिवार के नाम पर…

भांड है सलमान खान,कोई अवतारी पुरुष नहीं

तुम्हारे मंदिरों की मूर्तियों को तोड़ा जा रहा,तुम्हारे मंदिरों के प्रसाद को गौ मांस की चर्बी वाले घी से बनाया जा रहा,तुम्हारे खाने में थूका और जूस में मूत्र मिलाया जा रहा,तुम्हारी बेटियों की…

पर पृथ्वी पर दुबारा जन्म नहीं लेना चाहती : लता मंगेशकर

Positive India: Dayanand Pandey: किसी के दिल को लुभाना हो, दुलराना हो या फ़िर दिल की या किसी भी तकलीफ़ की तफ़सील मे जाना हो लता मंगेशकर कि आवाज हर मोड़ पर मुफ़ीद जान पड़ती है। राज्य सभा में…

कोई कुछ भी कहे, कंगना मुझको तो अच्छी लगती हैं!

कंगना जैसी हैं, वैसी क्यों हैं? वो इतनी बदतमीज़ और मुँहफट क्यों हैं? उन्हें इतना ग़ुस्सा क्यों आता है? जब वो आप की अदालत में आईं तो अपनी पैरवी करने का उनका अंदाज़ वैसा ही था, जैसे तनु-मनु…