लगभग 30 साल तक मुगल कैद में रहने के बाद यशुबाई मुक्त हुईं, और उन्हें मुक्ति दिलाने वाले थे पेशवा बालाजी विश्वनाथ! बाजीराव बल्लाळ!
छावा की कहानी यहाँ पूरी होती है।
सिकन्दर से अब्दाली तक हर बार क्रूरता की नई परिभाषाएं देखी लोगों ने, छील दिए गए चमड़े के ऊपर नमक का लेप स्वीकार किया, रस्सियों में बंध कर पशुवत जीवन स्वीकार किया, पर स्वाभिमान त्यागना स्वीकार…
जो योगेंद्र सलीम यादव ncert की बुक्स में लिखवाता है कि औरंगजेब टोपियां सिल कर गुजारा करता था, जो इरफ़ान हबीब बताता है कि वह तो दानी था, जो रोमिला आंटी आज भी मुगलों की याद में मल्टीपल ऑर्गेज़म…