अगर कुंभ जितनी संख्या में अरबी, बंग्लादेसी, या रोहिंग्या इकट्ठे हों तो वे एक दूसरे को…
दुर्घटना से विचलित हो कर श्रद्धालुओं को भी उदण्ड या लापरवाह कहने वाले भी अनेकों लोग मिल जाएंगे, पर मैं उलट सोचता हूँ। मेरे हिसाब से इससे अधिक नियंत्रित भीड़ नहीं मिलेगी दुनिया में।