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मुस्लिम

तुलसीदास ने साबित कर दिया कि कलम की ताक़त तलवार सें कहीं अधिक होती है

उस युग में जब प्रचार प्रसार के साधन नहीं थे तब तुलसी की मानस घर घर पहुँच गई । इसकी चौपाइयाँ दोहे छंद मंत्र बन कर दैनिक पूजा का अंग हो गए। तलवार की धार तले रौंदा जाता सनातन धर्म फिर सीना तान…

गोया मुगल न आए होते तो भारत यतीम ही बना रहता

ब्रिटिशर्स यहां व्यापारी बन कर आए थे लेकिन मुगल तो सीधे-सीध आक्रमणकारी बन कर आए थे । सोने की चिड़िया को लूट लिया । जाने कितने मंदिर लूटे और तोड़े बारंबार । समृद्धि , सुख-चैन लूट लिया । उन का…

जिन्ना का डिवाइड इंडिया डिस्ट्राय इंडिया का खेल अभी भी बदस्तूर जारी है बस डायरेक्ट…

डिवाइड इंडिया , डिस्ट्राय इंडिया का हामीदार जिन्ना तैमूर , अलाऊदीन खिलजी , औरंगजेब आदि का मिला-जुला कॉकटेल था। याद कीजिए जिन्ना का डायरेक्ट एक्शन प्लान। इतिहास का सब से बड़ा नरसंहार का दिन था…

जंगलराज के पर्याय एम वाई फैक्टर को चकनाचूर करना क्यों बहुत ज़रुरी हो गया है ?

मुलायम ने भी उत्तर प्रदेश में सब से ज़्यादा हिंदू-मुसलमान दंगे करवाए। अखिलेश यादव ने भी। लोकतंत्र के नाम पर कलंक हैं यह दोनों पार्टियां। राजद हो या सपा। सेक्यूलर होने की चाशनी में अपराधियों…

हिजाब की किताब फाड़ने के लिए मुस्लिम समाज को फिर एक शाहबानो क्यों चाहिए ?

यह शाहबानो ही थी जिस ने कांग्रेस की जड़ों में चाणक्य की तरह ऐसा मट्ठा डाला कि तब 1986 में 400 सांसदों वाली कांग्रेस अब आहिस्ता-आहिस्ता घट कर 44 पर आ गई है।

आख़िर वुजू के बिना नमाज होती कैसे है सड़क या सार्वजनिक जगह पर ?

सड़क या सार्वजनिक जगह पर यह नमाज पढ़ने वाले लोग पानी कहां पाते हैं ? वुजू कैसे करते हैं ? सड़क या सार्वजनिक जगह पर नमाज से क्या भाई-चारा खंडित नहीं होता। यह भी सामजिक अध्ययन का विषय है। यह…

आप मोदी को पसंद करें या नापसंद पर उन्होंने भ्रष्ट जातिवादी और पारिवारिक राजनीति पर…

दिल्ली की केंद्रीय राजनीति से नेहरु गांधी परिवार और अब महाराष्ट्र से पवार और ठाकरे परिवार और हरियाणा की राजनीति से चौटाला , भजनलाल परिवार की विदाई के साथ ही अब यह परिवार , जाति , भ्रष्टाचार…

अतिवादियों के पकड़े जाने पर विपक्षियों में तुष्टीकरण का मरोड़ क्यों उठ रहा?

नमाजवादी सरकार के समय आतंकवादियों को जेल से छोड़ने के लिये टोंटी नें विशेष आदेश दिया था...और आज योगी जी आतंकियों को गिरफ्तार कर रहे हैं..ठोंक रहे हैं...!

फिल्मों द्वारा मुस्लिम को अच्छा और हिन्दू को बुरा प्रोजेक्ट करने का वामपंथी षड्यंत्र

मुस्लिम को अच्छा और हिन्दू को बुरा प्रोजेक्ट करने का ये जो वर्षों से नैरेटिव का खेल इतिहास तथा फिल्मों के माध्यम से वामपंथी खेल रहे हैं ना ये एक सोचे समझे षड्यन्त्र के अंतर्गत कर रहे हैं।

लंपट वामियों कामियों सेक्युलरों की नौटंकी में क्यों नहीं फंस रहा बहुसंख्यक?

बहुसंख्यक हिन्दुओं में "ज़हर" पीने की परंपरा तो रही है, लेकिन समाज में जहर भरने की परंपरा का कंही जिक्र नहीं है। हिंदुओं की तो कोई ऐसी "किताब" भी नहीं जंहा से ज़हर लेकर परोसा जा सके।