डेढ़ दो महीने चलने वाले संसार के सबसे बड़े मेले में जीवन का हर रंग उभरता है। उल्लास, आनन्द, भय, दुख, अवसाद... इस बार ही नहीं, हर बार... सारे भाव साथ दौड़ते हैं, पर अंततः जीतता है उल्लास! वही…
दुर्घटना से विचलित हो कर श्रद्धालुओं को भी उदण्ड या लापरवाह कहने वाले भी अनेकों लोग मिल जाएंगे, पर मैं उलट सोचता हूँ। मेरे हिसाब से इससे अधिक नियंत्रित भीड़ नहीं मिलेगी दुनिया में।
ये अनपढ़ जलील व्यूखोर जिस तरह से कुम्भ की प्रतिष्ठा का नाश कर रहे हैं, उसके कारण इन्हें रोकना आवश्यक हो गया है। अन्यथा इस बार का मेला अपनी नकारात्मकता के लिए ही याद रह जायेगा।
कल्कि अवतार आएंगे,तो स्वार्थी हिंदू बच जाएंगे?कल्कि अवतार आएंगे,तो पाखंड करने वाले हिंदू बच जाएंगे?कल्कि अधर्म करने वालों का नाश करेंगे,ये कहा गया है,हिंदुओं से अधिक अधर्म कौन कर रहा है भला?
पॉजिटिव इंडिया दिल्ली
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