ग़नीमत बस यही थी कि अपर्णा आसाम में थीं। लखनऊ में नहीं। अपर्णा अगर लखनऊ में होतीं तो सपा के लोग उन को फंसाने के लिए , लांछन लगाने के लिए कुछ भी कर गुज़र गए होते।
श्रद्धेय अटल जी की साफ छवि,उनकी विकास परक नीतियों से चली सरकार के योगदान को अपने झूठ फरेब,कुचक्रो,छल छंदो और मक्कारी से देश की अधीर जनता को बहका कर कांग्रेस ने अगले दस साल पूरे देश को चोर…