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गांधी

पत्थर के नीचे दबे, गाँधी के अरमान।

Positive India:Rajesh Jain Rahi: 1- पुनः मुफ्त बँटने लगा, हिंसा का सामान। पत्थर के नीचे दबे, गाँधी के अरमान। 2-कैसा है वो नागरिक, इसका मिला प्रमाण। पत्थर के आधार पर, चाहे जो…

हिंदुस्तानियत,कश्मीरियत और इन्सानियत-प्रथम किश्त

06/08/1947 को गांधी ने संक्षिप्त नोट लिखकर नेहरू और वल्लभभाई पटेल को भेजा। गुजराती के पत्र में गांधी ने पटेल को लिखा, "तुम्हें इस मामले में कुछ करना चाहिए। मेरे ख्याल से कश्मीर का मामला सुधर…

‘भारत छोड़ो दिवस‘ पर कनक तिवारी का विशेष आलेख

भारतीय संसद और न्यायपालिका अंगरेजी संस्थाओं की नकलें हैं। संविधान भारत की धरती में रोपा गया अंगरेजी तेवर है। कोशिश की गई कहीं कहीं हिन्दुस्तानी नस्ल का भी दिखे। उसमें अंगरेजों के ज्यादा…

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से बात की,

पॉजिटिव इंडिया: नयी दिल्ली, 9 अगस्त, (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केरल और अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में बाढ़ की स्थिति को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री…

आजादी के प्रामाणिक खुद्दार संघर्षधर्मी जननायक की याद में अगस्त की भारत कथा

Positive India: Kanak Tiwari: अंगरेजी कैलेंडर के अनुसार अगस्त का महीना नए भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। एक अगस्त को तिलक जयंती से शुरू होकर 2 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन और 15 अगस्त…

गांधी के लिए किसान-कनक तिवारी की कलम से

गांधी की बेहद कुरूप मूर्तियां सारे देश में लगी हैं। वे अकेले हैं जो भारत में सभी दफ्तरों और न्यायाधीशों के सर के ऊपर तक टंगे हैं। उनके जन्मदिवस पर पूरी छुट्टी होती है। उनकी पुण्यतिथि पर उसकी…

आओ, सफाई दरोगा ! -कनक तिवारी

महात्मा गांधी तन से कहीं ज़्यादा मन की सफाई के पैरोकार हैं। आज होते तो उन्हें किसानों की आत्महत्या से गहरा सरोकार होता। वे ‘लव जेहाद‘ और ‘घर वापसी‘ जैसे चोचलों का विरोध करते। राजनेताओं के…

एक को चुनना पड़े तो किसे चुना जाए – कनक तिवारी

गांधी को फकत राजनेता समझने की भूल नहीं की जाए। तो राजनीति का पहले चमकता अब झिलमिलाता तारा जवाहरलाल नेहरू हैं। मैं पंडित नेहरू में शेक्सपियर के अमर चरित्र हैमलेट को भी देखता हूं और प्राचीन…

तेरा बयान गांधी!-कनक तिवारी की कलम से

गांधी ने तो पाखाना को भी संस्कृति का बैरोमीटर कहा था। आज देश के उद्योगपतियों, राजनयिकों और नौकरशाहों सहित उच्च मध्यवर्ग और होटलों आदि के शौचालयों में इतना अधिक पानी बहाया जाता है। उतना…

मरते जन आंदोलन, मरते गांधी- कनक तिवारी की कलम से

भारतीय लोकतंत्र खेत है जिसे सरकारी बदइंतजामी की बाड़ खा रही है। खेत की उपजाऊ ताकत कभी खत्म नहीं होती। बाड़ वह कृत्रिम मेड़ है जिसे कभी न कभी जन सैलाब जरूर बहा देगा।