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मतपत्रों में हेराफेरी की सबसे कम संभावना ईवीएम में है

-राजकमल गोस्वामी-

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Positive India: Rajkamal Goswami:
सरकारी नौकरी के अपने सम्पूर्ण अनुभव के आधार पर मैं यह बात दावे से कह सकता हूँ कि मतपत्रों में हेराफेरी की सबसे कम संभावना ईवीएम में है , इसी कारण किशोरी लाल शर्मा स्मृति ईरानी को आराम से हरा देते हैं , केजरीवाल ७० में से ६७ सीटें जीत जाते हैं फिर अगले चुनावों में २२ सीटों पर सिमट जाते हैं ।

मतपत्रों के दौर में लगभग हारे हुए मौलाना आज़ाद रामपुर से चुनाव जीत जाते थे । पहले और दूसरे चुनावों में तो जितने उम्मीदवार होते थे उतनी मतपेटियाँ रखी जाती थीं और मतपेटियों पर ही चुनाव चिह्न बना होता था । मतपत्र नासिक की सिक्योरिटी प्रेस से छप कर आते थे । मतपेटियाँ ऊपर से सील कर दी जाती थीं लेकिन नीचे से तल्ला खोल कर दूसरी मतपेटी में मतपत्रों को ट्रांसफर करना आसान होता था ।

बूथ कैप्चरिंग तो बहुत आसान थी। दबंग लोग वर्ग विशेष को पोलिंग बूथ पर पहुँचने ही नहीं देते थे । अक्सर बूथ पर दो तीन होमगार्ड ड्यूटी पर लगाये जाते थे । संवेदनशील पोलिंग बूथों पर चुनावकर्मी भी चुपचाप मनमानी होती देखते रहते थे । चुनाव आयोगों ने निष्पक्ष चुनाव कराने के लिये अनेक प्रयोग किये लेकिन परिवर्तन आया टीएन शेषन के आने के बाद ।

अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती और अनेक चरणों में चुनाव संचालन के कारण गुंडा और दबंग तत्व बूथों से दूर हो गया । इन अर्द्ध सैनिक बलों पर प्रदेश सरकार का कोई ज़ोर नहीं रह गया । लिहाॹा चुनाव बहुत हद तक निष्पक्ष होने लगे ।

ईवीएम ने मतदान प्रक्रिया को बहुत आसान बना दिया । दो दो दिन तक चलने वाली मतगणना अब दो चार घंटे में समाप्त हो जाती है । जो लोग कहते हैं कि ईवीएम हैक की जा सकती है वे या तो बूथ कैप्चरिंग करने वाली वोटिंग चाहते हैं या उनको पोलिंग प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है ।

फिलहाल ईवीएम से बेहतर और कोई निष्पक्ष चुनाव कराने विधि है नहीं । आरोप कोई कुछ भी लगाता रहे ।

साभार:राजकमल गोस्वामी-(यह लेखक अपने विचार हैं)

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