

Positive India:Sushobhit:
मैं भी तुम जैसा ही सेकुलर हूं, मेरे सेकुलर भाई, लेकिन मैंने अकेले सेकुलर नहीं होना, मैंने सबसे पहले सेकुलर नहीं होना!
मैं सेकुलर हूं बशर्ते इस्लाम भी सेकुलर हो, और माशाअल्ला हर लिहाज़ से सेकुलर हो!
मैं चाहता हूँ के समाज के तौरतरीक़ों पर से मज़हब की जकड़बंदी छूटे और “सिविल क़ानूनों” को मज़हबी क़ायदों से आज़ाद कराया जाए, बशर्ते इस्लाम भी वैसा करे!
तुम चाहते हो कि “जेंडर इक्वैलिटी” हो और औरतों को उनके हक़ मिलें, तुमसे ज़्यादा मैं वैसा चाहता हूँ, लेकिन मैं इस्लाम में भी वैसा चाहता हूँ! मुसलमान औरतों की बेहतरी के लिए छेड़ो ना एक मुहिम, मेरे सेकुलर भाई!
चलो, दक़ियानूसी किताबों को जलाएं, लेकिन “मनुस्मृति” ही क्यूं जलाएं, “शरीयत” क्यूँ ना जलाएं? चलो, “महिषासुर” की उपासना करें, लेकिन उससे पहले क्यूँ ना “इब्लीस” को सिजदा करें और बदल दें हमारे पत्थरों का रुख़, जिन पर लिक्खा था : “शैतान के लिए!”
आओ, हम “मज़हबी रिफ़ॉर्म्स” करें, लेकिन मत बोलो कि “नहीं, इस्लाम नहीं, प्लीज़, लीव इस्लाम आउट ऑफ़ स्कीम्स!”
मैं भी लिबरल हूँ, सेकुलर हूँ, प्रोग्रेसिव हूँ, बड़े भाई, जैसे कि तुम हो. लेकिन मैंने अकेला लिबरल, सेकुलर, प्रोग्रेसिव नहीं होना!
जाओ, पहले उस तवारीख़ का पता लगाओ, उस नस्ल का, उस नीयत का, जिसने हिंदुस्तान के हाथ पर लिख दिया था : “मेरी औलादों में अलगाव हो!”
तरक़्क़ी औ तमद्दुन के तमाम हलफ़नामों पर मैं दस्तख़त करूंगा, मेरे भाई, लेकिन मैं अकेला साइन नहीं करूंगा, मैं सबसे पहले साइन नहीं करूंगा!
जाओ, पहले इस्लाम का “साइन” लेकर आओ!
Courtesy:Sushobhit Saktawat-(The views expressed solely belong to the writer only)