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ज्योतिष को तर्क की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता

-राजकमल गोस्वामी की कलम से-

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Positive India: Rajkamal Goswami:
ज्योतिष पर एक टीप
ज्योतिष को तर्क की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता वह विफल हो जायेगी । शत्रु राशि में बैठ कर भी शुक्र उच्चस्थ माना जाता है ।

लेकिन तर्क की कसौटी पर वैद्यक भी फेल हो जायेगी । परीक्षण और अनुभव के अतिरिक्त अन्य उपाय नहीं है किसी औषधि के प्रभाव को जानने का । सदियों के प्रयोगों के बाद मनुष्य जान पाया है कि किन बीजों और वनस्पतियों का भोजन के रूप में और औषधियों के रूप में प्रयोग किया जा सकता है । कितने लोग तो इन परीक्षणों में धतूरा खा कर विक्षिप्त हो गये होंगे । वीरबहूटी जैसे कीड़े का औषधीय उपयोग हो सकता है यह जानने में कितने जीवन नष्ट हो गये होंगे ।

ग्रह नक्षत्र तो काल चक्र की घड़ी की सुइयाँ हैं और जन्मकुंडली उसकी छाप है । फलित ज्योतिष भी परीक्षित योगों और दैवज्ञ के अनुभवों पर ही आधारित होता है जिसके आधार पर वह जातक के बारे में अनुमान लगाता है और कई बार सही फलादेश करता है ।

विज्ञान तो सदैव ही शोध के स्तर पर रहता है और उसके निष्कर्ष हमेशा माने नहीं जाते । सरसों के तेल के खाद्य तेल के रूप में उपयोग करने पर अमेरिका में पूर्ण प्रतिबंध है कि वह विषाक्त होता है और यहाँ उत्तर भारत में उसके बिना भोजन की कल्पना नहीं की जा सकती ।

साभार:राजकमल गोस्वामी-(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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