

Positive India:Dr.Sanjay
Shrivastava
मैं उस समय दन्तेवाड़ा में पदस्थ था..धर्मशाला में दो अधिकारियों के साथ रूम शेयर करके रहता था..वे दोनों जिला पंचायत में ए पी ओ थे..बढ़िया मित्रता हो गयी थी..एक दिन तिवारी जी से मिलने एक लड़का आया..और तिवारी जी ने हम सबको अपने पास बुलाया कहा”ये आशीष जी हैं..ये आपको कुछ बताएंगे”..
आशीष दिखने में बड़ा सीधा सा बन्दा लग रहा था..
उसने एक ब्राउज़र निकाला और शुरू हो गया उसके विवरण में बोलना..”ये एक ऐसा तरल है जिसकी 5 बूंदें पानी में डालकर पीने से आपके शरीर मे मिनरल्स की आपूर्ति हो जाएगी..थकान कमज़ोरी से राहत होगी.”..और पता नहीं क्या क्या..मुझे बोरियत होने लगी..मैं वहां से हट गया.. तिवारी जी बोले”का होंगे संजय, बोर हो गे हस का”?
मैं बोला”मुझे इसमे कोई रुचि नहीं भैया .आप लोग देखो”..और बाहर आ गया था..
आशीष ने सिर्फ एक बार मुझे ध्यान से देखा..बोला कुछ नहीं..
हां!थोड़ा निराश ज़रूर हो गया होगा..
बाद में बाहर आकर उसने पूछा”आप डॉक्टर हैं क्या”?”हां”मैं बोला”आप कैसे समझ गए?”..वो बोला “अनुभव है”..उसकी मुस्कुराहट बड़ी निश्छल थी…मुझे वो अच्छा लगा था..
क्रमशः..
लेखक: डॉक्टर संजय श्रीवास्तव