www.positiveindia.net.in
Horizontal Banner 1

दोस्त-मेरा संस्मरण-कड़ी-2

laxmi narayan hospital 2025 ad

Positive India:Dr.Sanjay Shrivastava:
कुछ दिनों बाद मैं उसे भूल गया..अब मैंने कैलाश नगर में एक कमरा किराये पर ले लिया था..
एक दिन मैं अपने दरवाजे पर खड़ा था,उस दिन छुट्टी थी तो फुरसत में था…सामने से एग रोल बेचने वाले साहू जी निकले..वो अपने हाथ मे एक थैला पकड़े हुए थे..”कहाँ जा रहे हो साहू भैया?”मैंने पूछा.. वो बोले “आशीष के घर जा रहा हूं सर..वहीं खाना बना कर खाने का प्रोग्राम है”..”अच्छा”मैं बोला “कौन आशीष”?वो बोले “उस दिन जो धर्मशाला में अपना प्रोडक्ट दिखाने आया था”..”ओह!वह!इधर ही रहता है क्या”?मैंने पूछा…. “जी”ये मोड़ वाला घर उसी का है सर”…
“मैं भी चलूं क्या”..मैंने पूछा… चलो साब!”वो बोले…मैं उनके साथ हो लिया….आशीष के घर पहुंचे…दरवाजा खटखटाया… अंदर म्यूजिक सिस्टम की आवाज़ आ रही थी..आशीष ने दरवाजा खोला…मुझे देखकर हंसकर बोला”आओ सर जी”…वो ही निश्छल हंसी..मैं बोला “मैं भी खाना खाने आया हूं आशीष भाई”!..बोला “ज़रूर सर!बैठिये,गाना सुनिए..मैं तैयारी करता हूं…”
…और उन दोनों ने दाल चावल सब्जी सब बना लिए…उसके यहां सभी सुविधाएं थीं,टी वी, ए सी,म्यूजिक सिस्टम, लैपटॉप, बढ़िया बेड…. आधुनिकता से सजा हुआ घर था…
खाना बहुत स्वादिष्ट बना था…
मैंने बोला”आपकी शादी हो गयी आशीष भाई”?वो हंसने लगा..बोला”अरे सर जी!शादी हो गयी होती तो इतना खाना बनाने कैसे आता”….मैं भी हंस दिया…
खाना खाकर साहू जी चले गए…
क्रमशः…..
लेखक: डॉक्टर संजय श्रीवास्तव

Leave A Reply

Your email address will not be published.