
साइकिलवाले गैंग में आज नसीमुद्दीन की एंट्री बड़ा गुल खिलाएगी
-सतीश चंद्र मिश्रा की कलम से-

Positive India:Satish Chandra Mishra:
खेल में अभी कई इंट्रेस्टिंग मोड़ आने शेष हैं….
असल समाजवाद अब नसीमुद्दीन लईहै…
साइकिलवाले गैंग की साइकिल का सबसे ईमानदार समाजवादी सवार था गायत्री प्रजापति। योगी ने उस प्रजापतिया को जब से जेल में डाला है, तब ही से साइकिलवाले गैंग को जिस हीरे की तलाश थी, वो कोहिनूर साइकिलवाले गैंग को अब मिला है।
“खाइस पउव्वा भर, पर थुकवाइस झउव्वा भर…” सरीखे “टोंटी कांड” से साइकिलवाले गैंग की नाक अब नहीं कटेगी। कम से कम नसीमुद्दीनवे से इत्ती उम्मीद तो है ही।अब साइकिलवाला गैंग थुकवायेगा झउव्वा भर तो, खायेगा भी झउव्वा भर।
याद करिए कि, हाथी वाली सरकार में पीडब्लूडी, आबकारी, सिंचाई, नगर विकास, आवास सरीखे भारी भरकम “मलाईदार” 8-10 हाथी जैसे विभागों का कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन ही था। उस दौर में नसीमुद्दीन के चाकरों के चाकरों के चमचे 25 से 50 लाख तक की महंगी कारों से बेख़ौफ़ फर्राटा भरते थे।
2007 से 2012 तक, जब प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार थी तब राजधानी लखनऊ में सत्ता के गलियारों से लेकर पत्रकारिता की पगडंडियों तक यह चर्चा आम थी कि नसीमुद्दीन के बंगले में नोट गिनने की एक मशीन नहीं बल्कि कई मशीनें लगी हुई हैं। यह कोई अफवाह अटकल या गप्प नहीं थी. उस दौर में वहां उन मशीनों का दर्शन”लाभ” ले चुके कुछ सरकारी और ठेकेदारी के “सूरमाओं” की स्वीकारोक्ति का मैं साक्षी भी रहा हूं.
अतः साइकिलवाले गैंग में आज नसीमुद्दीन की एंट्री बड़ा गुल खिलाएगी यह उम्मीद पूरे साइकिल गैंग को है।
… लेकिन नसीमुद्दीन की फाइल भी काफी मोटी है, शायद प्रजापतिया से ज्यादा मोटी है और सीएम भी योगी ही हैं।
इसलिए खेल में अभी कई इंट्रेस्टिंग मोड़ आने शेष हैं….
साभार: सतीश चंद्र मिश्रा-(यह लेखक के अपने विचार है)