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छालीवुड स्टार शेखर सोनी का यू ट्यूब चैनल लांच
इस यू ट्यूब चैनल पर दर्शकों को शेखर सोनी द्वारा रचित हिंदी छत्तीसगढ़ी एल्बम सांग, वेबसीरीज,व शार्ट फिल्में देखने मिलेंगी।
INDIAN ARMY CONTINGENT DEPARTS FOR MULTINATIONAL MILITARY EXERCISE KHAAN QUEST
Positive India:New Delhi:
The Indian Army contingent departed today for the Multinational Military Exercise KHAAN QUEST. The exercise is scheduled to be conducted from 27th July to 9th…
अम्बानी की अति विलासितापूर्ण शादी देखकर मुझे अपने विवाह की याद क्यों आ रही है?
मैंने अपनी शादी गांधीवादी शैली में चंद हज़ार रुपयों में सम्पन्न कर लिया था! यही कोई ३० हज़ार का खर्च हुआ होगा!
मात्र सत्रह वर्ष की आयु में अंग्रेजी सरकार ने आजाद को जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर इनाम…
अमर रहिये तिवारी जी! इस राष्ट्र को आप जैसे युवकों की आवश्यकता सदैव रहेगी... आपके जन्मदिन पर आपको नमन!
दुकानदारों को अपनी पहचान छिपाने का हक देना सुप्रीम कोर्ट ने किस आधार पर सही माना है?
भारतीय मुसलमान राजनीति का शिकार हुआ है या भारतीय राजनीति मुसलमानों की शिकार होकर रह गई है, शिक्षण संस्थानों में जो मुसलमान बुर्के की वकालत करते हैं कि हमारी महिलाएं अपनी पहचान यानी बुर्का…
कांग्रेसी , वामपंथी और मुस्लिम समाज के लोगों का सामूहिक कदम ताल अद्भुत क्यों है?
वामपंथी धर्म को अफीम मानते हैं । जब कि वहीं मुस्लिम समाज के लोग मज़हब के आगे किसी को नहीं जानते , मानते और सुनते हैं । मज़हब के आगे सब कुछ भाड़ में ।
शिवाजी महाराज ने डंके की चोट पर हिन्दवी साम्राज्य की घोषणा की।
राष्ट्र के इतिहास में #छत्रपति_शिवाजी_महाराज वे प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने एक ऐसे भारत की कल्पना को साकार रूप दिया जिसमें हिन्दू को हिन्दू होने का गौरव था।
जीवित रहते दुर्भाग्यशाली और जीवन के बाद सौभाग्यशाली होने की अजीब विडंबना मुक्तिबोध ने…
Positive India:Jai Prakash:
दुर्भाग्य ने मुक्तिबोध का पीछा अंत तक नहीं छोड़ा। वह भोपाल के हमीदिया अस्पताल और दिल्ली के एम्स में करीब छह महीने तक भर्ती रहे। बचाने की तमाम कोशिशें डाक्टरों…
राम कथा का प्रामाणिक स्रोत कौन सा है ?
सबरी के जूठे बेरों वाली कथा एक बहुत बड़े वर्ग को यह आत्मविश्वास देती रही है कि जब जगतनियन्ता हमारे घर भोजन कर सकते हैं तो हम छोटे कैसे हुए?
गुरु दक्षिणा का नाम आते ही सबसे पहले एकलव्य और द्रोणाचार्य की कथा ही मनोमस्तिष्क में…
गुरुओं को कभी एकलव्य जैसे शिष्यों की कामना नहीं करनी चाहिए । जिस तरह साधक सद्गुरु की खोज में रहता है उसी तरह सद्गुरु को भी पात्र शिष्य की खोज रहती है ।