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Politics

किसी के बाप का हिंन्दोस्तान थोड़े है

Positive India:Vijay Bahadur Singh: केरल की राजधानी त्रिवेन्द्रम विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के दस द्विवसीय आमंत्रण पर आया तो विश्विद्यालय के छात्रों द्वारा उसके प्रवेश द्वार वाले चतुष्पथ…

दूसरे विश्वयुद्ध का खलनायक हिटलर को क्यो माना जाता है ?

फिनलैंड ने यूक्रेन की मदद करनी शुरू कर दी है । रूस कीव पर कब्जा भी कर ले तो भी युद्ध जारी रहेगा । द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी ने फ्रांस पर कब्जा कर लिया था मगर युद्ध फ्रांस ही जीता ।

वो कौन लोग है जो भारत माता की जय कहने को भी गाली समझते हैं ?

दंगाइयों और आतंकियों को मां की फ़िक्र कहां है भला ? वह तो इसी गुमान में जीते हैं कि उन की कोई मां नहीं है और जाने किस गुमान में , अपनी बेहूदगी में कहते फिरते हैं कि किसी के बाप का हिंदुस्तान…

क्या पवन खेड़ा में सुर्खाब के पर लगे हैं ?

सर्वोच्च न्यायालय का सीधे दरवाजा खटखटाने और अपनी मर्जी से आधी रात में भी जजों को काम पर लगाने का विशेषाधिकार क्या सिर्फ आतंकियों और नेताओं को ही है ?

बुद्धि से राम कथा गाने वाले कुमार विश्वास अपने संत के किरदार मे कभी-कभी विवादित क्यो…

बुद्धि से राम कथा गाने वाले संत हैं कुमार विश्वास। जबकि रामकथा का गायन वाचन असल में हृदय का चीज है। आत्मा का चीज है। अध्यात्म की विषय वस्तु है। कुमार विश्वास भगवान राम के किरदार को सामाजिक…

शराब नीति घोटाले में सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को क्यो किया गिरफ्तार?

Positive India:Vishal Jha: इस बात पर ध्यान देना होगा, सवाल यदि हो कि क्या शराब घोटाला हुआ है? उत्तर है- नहीं। क्या पैसों का घोटाला हुआ है? उत्तर है- नहीं। फिर आबकारी घोटाला है क्या? असल में…

यूक्रेन पर हमले के एक साल बाद रूस क्यो फ़्रस्ट्रेटेड हो चुका है ?

जी में आता है ये मुर्दा चाँद तारे नोच लूँ इस किनारे नोच लूँ या उस किनारे नोच लूँ एक दो की बात क्या सारे के सारे नोच लूँ ऐ ग़मे दिल क्या करूँ ऐ वहशते दिल क्या करूँ

पाकिस्तान का अन्न संकट :क्या भारत को बीस लाख टन गेहूं देना चाहिए ?

ख़ैर हम तो वसुधैव कुटुंबकम के मानने वाले हैं । राष्ट्रीय स्वयं संघ भी उन्हीं सनातन सिद्धांतों का अनुयायी है । पाकिस्तान की जनता पर अन्न संकट है । संघ चाहता है कि भारत उसे कम से कम २० लाख टन…

जब मौलवी तुग़लक के झांसे में आ गया

अकसर होता है कि धर्म राजनीति पर जब तब हावी होता रहता है । लेकिन राजनीतिज्ञ धर्म का कैसे इस्तेमाल कर धर्म को कूड़े में डालते रहते हैं उस का नायाब उदाहरण तुग़लक ने पेश किया है ।