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Politics
जब तक सरकार नहीं चाहती है तब तक सरकारी उपक्रम घाटे में नहीं जा सकते ।
ख़ुशी की बात है कि सरकार ने बीएसएनएल को ९० हज़ार करोड़ का पैकेज दिया है । वजह यह भी है कि सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रामीण योजनाएँ प्राइवेट सेक्टर कभी पूरी नहीं कर सकता । बीएसएनएल का अंडमान…
ब्रेकिंग : केवीआईसी ने रचा इतिहास, 9 वर्षों में बिक्री में 332 प्रतिशत की वृद्धि !
स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार केवीआईसी के उत्पादों का कारोबार 1.34 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले 9 वित्त वर्षों में, ग्रामीण क्षेत्र के कारीगरों…
Indian Railways Earns Rs 14642 Crores From Freight Loading In May 2023
Following the Mantra, “Hungry For Cargo”, IR has made sustained efforts to improve the ease of doing business as well as improve the service delivery at competitive prices.
अगले दस महीने में भाजपा क्या करे ?
बदलते राजनैतिक परिदृश्य को स्वीकार कर, संस्थागत कमियों पर चिंतन कीजिए, केवल मोदी फैक्टर अब चुनाव में जीत सुनिश्चित नहीं करेगा (मोदी की बात आगे ले जाना अत्यावश्यक)
बालासोर मे हुई रेल दुर्घटना मे राजनैतिक गिद्ध शवों मे भी कुर्सी का रास्ता कैसे खोज…
शवों पर राजनीति करने वाले गिद्धों को दर्द,पीड़ा,आंसू और वेदना से कोई मतलब नही है....उनका भोज तो अभी से शुरू हो गया है..!
पैसा , औरत और अदालतों के फ़ैसले
हाईकोर्ट और हाईकोर्ट के जजों ने ऐसे-ऐसे कारनामे किए हैं कि अगर इन की न्यायिक तानाशाही न हो , सही जांच हो जाए तो अस्सी प्रतिशत जस्टिस लोग जेल में होंगे। सोचिए कि अपने को जब-तब कम्युनिस्ट…
लड़की के साथ हिंसा :आज किसी लड़की को घर में बांधकर रखना इतना सरल है क्या?
बच्चे जब किशोर होंगे, युवा होंगे तो वो प्रेम संबंधों में जाएंगे, यह अपरिहार्य है। अधिक से अधिक आप इतना ही कर सकते हैं कि उनकी निजता को भंग किए बिना उनसे संवाद करें और उनसे सावधान रहने का…
फिल्म ’72 हूरें’ की आशातीत तेज चर्चा क्यो हो रही है?
बॉलीवुड ने जिस प्रकार स्पॉन्सरशिप के ताकत पर जिहादी खेल का एक मायाजाल तैयार किया था, अब हासिये की प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के फिल्मों का भी मुकाबला नहीं कर पा रहा। यही स्वत: स्फूर्त ताकत की…
भारतीय समाजवाद के जनक कबीर
कबीर को जिन्होंने मात्र धर्म का विकल्प समझा उन्होंने ही कबीर के समाजवादी आंदोलन का,विचारों का कत्ल कर दिया । जिन्होंने कबीर को मात्र धर्मगुरु मानकर उनके "गेय शब्दों"को लेकर निकले व जगह-जगह…
आज की पीढी ओलंपिक पदक विजेताओं की क़द्र क्यो नही कर रही है ?
आज की पीढ़ी ने ओलंपिक पदकों का सूखा देखा नहीं है इसलिए पदक विजेताओं की क़द्र भी नहीं है ।