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Politics
प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में प्रगति मैदान कॉरिडोर परियोजना का किया उद्घाटन
पॉजिटिव इंडिया: दिल्ली;
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति मैदान एकीकृत ट्रांजिट कॉरिडोर परियोजना की मुख्य सुरंग और पांच अंडरपास का रविवार को उद्घाटन किया। यह परियोजना प्रगति मैदान…
क्या अग्निपथ पर चलने के लिए कोई जबरदस्ती कर रहा है?
सैन्य प्रक्रिया के बहाने सरकार के पास जितनी रिक्तियां है, उससे चार गुनी ज्यादा युवाओं को डिफेंस सेक्टर से जोर कर उन्हें वास्तव में कौशल युक्त, आर्थिक रूप से सशक्त, असली प्रमाण पत्र के साथ,…
जानिए कैसे आरक्षण की बैसाखी पर खड़े लोगों ने मलाई चाटने के लिए एकलव्य का फर्जी अंगूठा…
एकलव्य कोई दबा-कुचला निर्धन नहीं था । श्रृंगबेर राज्य का शासक था । लेकिन अंगूठे का छल का व्याकरण रच कर आरक्षण की मलाई चाटनी ज़रुर एक छल है । इस छल और कुप्रचार को समाप्त किया जाना चाहिए ।
मां के 100वें वर्ष में प्रवेश करने पर पीएम मोदी का भावनात्मक ब्लॉग
पीएम मोदी ने अपनी मां के जीवन की कहानी का कुछ शब्दों में इस तरह वर्णन किया...
“अभावों की हर कहानी से परे, एक मां की गौरवशाली गाथा है,
हर संघर्ष से कहीं ऊपर, एक मां का दृढ़ संकल्प है।”…
अग्निवीरों की भर्ती आयु सीमा 21 वर्ष से बढ़ाकर 23 वर्ष की गई
अग्निपथ योजना भारतीय युवाओं के लिए सशस्त्र बलों में शामिल होने और अपनी मातृभूमि की सेवा करने का एक स्वर्णिम अवसर है।
गद्दारों में हाहाकार क्यों मचा रही है प्रधानमंत्री मोदी की अग्निपथ योजना?
अग्निपथ योजना की आलोचना वो कर रहे हैं जिन्होंने पूरे देश में 18 बरस से ऊपर के हर ग्रामीण नौजवान को साल में केवल 100 दिन 100 रूपये की दिहाड़ी देकर गड्ढे खोदने के धंधे में लगा दिया था।
अग्निपथ योजना युवाओं को कौशल युक्त आर्थिक रूप से सशक्त एवं सम्मान के साथ जीवन जीने का…
21 वर्ष उनकी उम्र है। साथ साथ पढ़ाई किए रहेंगे तो एकेडमिक डिग्री भी प्राप्त रखेंगे। हाथ में सैन्य सेवा का प्रमाण पत्र है। तमाम तरह के स्किल हैं। 23 लाख रुपये का बैकअप है। लेकिन अगर इतने…
India Successfully Tested Nuclear Capable Short-Range Ballistic Missile PRITHVI-II
Prithvi was the first missile to be developed under the program. DRDO attempted to build a surface-to-air missile under Project Devil.
अरुंधति के जले गीतांजलि को भी फूंक-फूंक कर पीजिये!
यह कथित कहानी एक बूढ़ी विधवा भारतीय महिला के अपने बचपन के पाकिस्तानी मुस्लिम प्रेमी तक चले जाने और वहीं किसी रेत वाले क़ब्रिस्तान में ‘समाधि’ ले लेने की महानतम गाथा है। भाषा भी सुना है ऐसी…
लोग पूछने लगे हैं आफरीन तो अदालत पर विश्वास करती ही नहीं है?
जिस समुदाय ने भीड़ को अंतिम सत्य माना है, वही आज लोकतांत्रिक संस्थाओं की क्यो दुहाई दे रहा?