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Politics
भारतीय भ्रष्ट ज्यूडिशरी सिस्टम उस जज के समान है जो अतुल को बर्बाद कर बीवी के नाजायज…
हिंदुस्तान उनके बाप का नहीं था, न अब है। लेकिन आज भी मुस्लिम समाज की दादागिरी और धौंस देखिए, आधी भूमि हड़पकर भी बिल्कुल अतुल की बीवी जैसा आचरण है
भारत के लिए एक नया संविधान समय की आवश्यकता है
लोहिया कहते थे कि ज़िंदा क़ौमें पाँच साल इंतज़ार नहीं करतीं और फ़्रांस कहता है कि ज़िन्दा क़ौमें एक संविधान से चिपकी नहीं रहतीं ।
पुष्पा जैसी सबसे अधिक कमाई करने वाली अधिकांश फिल्में हिंसा से भरी हुई है
यह धर्म का अनुशासन ही है कि ईरान से भाग कर आये सौ डेढ़ सौ पारसी न केवल हजार वर्ष से सुखमय जीवन जी रहे हैं, बल्कि टाटा के रूप में सबसे बड़े व्यवसायी और भाभा के रूप में सबसे बड़े वैज्ञानिक बन…
कुछ बाते कभी भूली नहीं जानी चाहिए
Positive India:Sarvesh Kumar Tiwari:
हमें याद रहना चाहिए कि सन 1528 में एक क्रूर, असभ्य, अभद्र आतंकवादी ने अयोध्या में महाराज विजयचन्द( कन्नौज नरेश जयचंद के पिता! मन्दिर जयचन्द की…
अब दिल्ली की चुनौती
दिल्ली चुनाव के संदर्भ में सबसे खराब स्थिति कांग्रेस की रही है. हरियाणा के बाद महाराष्ट्र में भी भीषण पराजय से दिल्ली पुन: दूर नज़र आने लगी है ।
बड़े भाई साहब:ख्यातनाम पत्रकार व कवि श्री ललित सुरजन जी की चौथी पुण्य तिथि पर विशेष…
क्या कारण है कि ललित जी जैसा समर्थ पत्रकार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय का कुलपति नहीं बन सका जबकि उसकी स्थापना हुए पन्द्रह वर्ष बीत चुके हैं। देश के बहुत बडे कवि व उपन्यासकार…
एकनाथ शिंदे की हालत उद्धव ठाकरे से भी बुरी हो सकती है
एकनाथ शिंदे की हालत उद्धव ठाकरे से भी बुरी हो सकती है। सच को जैसे उद्धव ठाकरे नहीं स्वीकार कर पाए थे , एकनाथ शिंदे भी स्वीकार नहीं कर पा रहे।
चुपके-चुपके चल गया भाजपा का दांव
महाराष्ट्र में भाजपा का मुख्यमंत्री तय है. कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 27 नवंबर को स्वीकार कर लिया कि उन्हें महाराष्ट्र में नये नेतृत्व के संबंध में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी व…
बांग्लादेश में गिरफ्तार चिन्मय कृष्ण दास की मांग है कि हिंदुओं को प्रताड़ित न किया…
चिन्मय दास की तस्वीर हर हिन्दू की फेसबुक वाल पर होनी चाहिये। यदि हम उनके लिए और कुछ नहीं कर पा रहे तो कम से कम इतना ही सही...
देश को धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जैसे सैकड़ों धर्मनिष्ठ नायकों की आवश्यकता है
भारत का सांस्कृतिक पतन चाहने वाली विदेशी शक्तियां" भी जिस समाज के विरुद्ध सैकड़ों वर्षों से विषवमन करती रही हैं , उस समाज का एक नवयुवक अल्पायु में ही करोड़ों लोगों का नायक बना हुआ है। यह धर्म…