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Politics

जब मज़हब भारी हो जाता है तो एक जिन्ना खड़ा हो जाता है और पाकिस्तान पैदा हो जाता है

मुस्लिम समस्या ठीक वैसे ही जैसे जो पाकिस्तान बनते समय थी । वह है मुस्लिम प्रिवलेज । अब धीरे धीरे यह प्रिवलेज फिर से पूरे देश में पांव पसार चुका है ।

प्रसिद्धि ही यदि पैमाना है, तो क्या दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद को भी नमन करना चाहिए?

और तो और, आजकल उर्फी जावेद जितनी प्रसिद्ध है, उतने प्रसिद्ध तो जावेद अख्तर भी नहीं हैं। तो क्या किया जाए? शर्मनाक! अत्यंत शर्मनाक!!

क्या मनुष्य के सबसे सुंदर अंग उसके पांव ही होते हैं?

स्त्री नख से शिख तक सुन्दर होती है, पुरुष नहीं। पुरुष का सौंदर्य उसके चेहरे पर तब उभरता है जब वह अपने साहस के बल पर विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल कर लेता है।

जेएनयू से ब्राह्मणों के विरोध में उठा सुर एक विमर्श के रूप में क्यो स्थापित हो गया है…

ब्राह्मण का विरोध ब्राह्मणों की एक परीक्षा की तरह भी तो है। बौद्धिकता पर कब्जा है तो इसमें बिना आवेशित हुए सफल होना पड़ेगा। शस्त्र उठाए बिना जीतना पड़ेगा। समाज का संरक्षण करना पड़ेगा।…

छत्तीसगढ़ के 94.7 प्रतिशत किसान “किसान सम्मान निधि” से क्यो हुए बाहर ?

छत्तीसगढ़ को 'धान का कटोरा' कहा जाता है, परन्तु एक और अंतरराष्ट्रीय कहावत भी मशहूर है कि "धान की खेती और गरीबी का चोली दामन का साथ होता है"

आईआईटी दिल्ली ने पानी से सक्रिय नई कम लागत वाली ‘विद्युत रहित तापन प्रणाली…

इस प्रणाली के सक्रिय ताप तत्व (एक्टिव हीटिंग एलिमेंट्स) में पर्यावरण के अनुकूल खनिजों और लवणों का ऐसा मिश्रण होता है, जो ऊष्माक्षेपी (एक्ज़ोथिर्मिक) ऊर्जा उत्पन्न करता है जिसके परिणामस्वरूप…

महान एकीकरण करने वाले अहोम राजा सुकफा की भूमिका पर प्रकाश डालने के साथ असम दिवस मनाया…

स्वर्गदेव सुकफा हर असमिया के लिए एकता, सुशासन और शौर्य का प्रतीक है, जिससे वह प्रेरणा ले सकें। महान राजा और अहोम वंश के संस्थापक ने बुद्धि, वीरता, दूरदर्शी और एकजुटता का एक दुर्लभ संयोजन…

आख़िर रवीश कुमार अब अपने दिल को समझाने कहां जाएं ?

रवीश कुमार की फैन फालोइंग तमाम डिस्टर्ब , तमाम तबाह , परेशान लोगों की वैसे ही तो है नहीं है। कुछ तो बात है । सारी निगेटिव खबरें इन की खुराक हैं। कभी ठंडे दिमाग से सोच कर देखिए कि रवीश कुमार…