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Food

गूँगे जानवर भूख-प्यास, तकलीफ़ के पलों में आँखों से सम्प्रेषित करने का क्यों जतन करते…

हर दिन मनुष्य-जाति का पेट बड़ा होता जा रहा है, उसके लालच की भूख बढ़ती जा रही है, और इसकी भरपाई उन जानवरों से की जा रही है, जो सबसे मासूम थे, सबसे भले, सबसे नेक और इसीलिए- सबसे आसान शिकार!

संसार में इतने लोग भोजन करते हैं, उनके बरतन कौन मांजता है?

बड़े से बड़ा धन्नासेठ भी अपने जूतों के तस्में स्वयं बाँधता है, कमीज़ के बटन किसी दास से नहीं लगवाता। नृपेन्द्र के केश कोई और काढ़ता हो, वैसी बात नहीं है।

क्या ग़जब है कि ख़ाना ख़ाना हमें अरबों और तुर्कों ने सिखाया !!

इस्लाम अपने उद्भव के समय शक्कर और उसके उत्पादों से बहुत परिचित नहीं था । भारत में घुसते ही मुसलमानों की आँखें यहाँ के वैभव से चुँधिया गईं ।

यह मांसाहार बनाम शाकाहार की नहीं, जीवहत्या बनाम जीवदया की बहस है!

मैं जीवहत्या को जीवदया से अधिक महत्व देता हूं और इसके बावजूद वह अपने नैतिक आधार की रक्षा कर सके। और वो यह बात जानता है कि नैतिक आधार पर उसका पक्ष कमज़ोर है।

खेत से प्रसंस्करण इकाई तक सीता, शांति और जूही का मजदूर से उद्यमी बनने का सफ़र

पॉजिटिव इंडिया; रायपुर:(ग्राम कटकोना) पहले करती थीं खेत में मजदूरी, आज बना रही हैं आलू का चिप्स ,कभी दूसरों के यहां मजदूरी करने वाली ग्राम कटकोना की सीता, शांति और जूही अब उद्यमी हैं,…

भारत की बायो इकोनॉमी पिछले आठ वर्षों में आठ गुना बढ़ी: मोदी

पॉजिटिव इंडिया :दिल्ली; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश के विकास को गति देने के लिए उनकी सरकार सभी क्षेत्रों को मजबूत बनाने में यकीन रखती है, जबकि पहले की सरकारों…