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इरफान खान साहब, फिर मिलेंगे, कहीं किसी रोज, किसी मोड़ पर

आज इरफान खान साहब के अचानक जाने की खबर मिली। आंख मे आंसू डबडबा गए और कंठ भर आया। आप जितने अच्छे एक्टर थे, उतने ही नेक दिल इंसान भी थे । आपकी कमी हमेशा खलेगी , और इस कमी को कोई नही भर पाएगा…

क्या मैं अब भी सहनशील बना रहूं ?

मुझे मातृभूमि से प्यार करना, सिखाया गया माता-पिता एवं गुरुओं के द्वारा। मगर मुझे अन्याय के खिलाफ लड़ना किसी ने नहीं सिखाया। तलवार तो क्या, मैं लाठी चलाना भी नहीं सीख सका।