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Editorial
तुग़लक , मौलवी और सेक्यूलरिज्म
सेक्यूलरिज्म के नशे में चूर , राम के अस्तित्व को जो लोग अदालत में हलफनामा दे कर इंकार करते हैं , वही लोग रावण दहन भी करते हैं । जनेऊ पहन कर मंदिर-मंदिर घूमते हैं । भारत में सेक्यूलरिज्म के…
नसीरुद्दीन शाह के नाम पर सिनेमा हॉल पहुँचने वाले दर्शकों की संख्या भारत में…
दरअसल नसीरुद्दीन शाह के एनएसडी वाले चेलों ने नसीरुद्दीन की इतनी बड़ाई कर दी, कि उन्हें लगने लगा वे अभिनय के शहंशाह हैं।
हरमंदिर साहब में योग करने पर सिखों की भावनाएँ क्यों भड़क जाती हैं?
कट्टरवादी यह बात भूल जाते हैं कि जब मुस्लिम लीग ने डाइरेक्ट एक्शन डे मनाया था तब मुल्क में अंग्रेज़ों का निज़ाम था और बंगाल में जिन्ना का दाहिना हाथ हुसैन शहीद सोहरावर्दी सत्तासीन था इसलिए…
वामियों के इकोसिस्टम ने एकजुट होकर सुशोभित को क्यों घेरा ?
ऐसा कौन-सा डेस्पेरेशन था, जो हिन्दी के इतने सारे होनहार एक साथ टूट पड़े और वह भी उस किताब के लिए जिसे उन्होंने अभी पढ़ा तक नहीं है, न कभी पढ़ेंगे। जानवरों के हित में बात करना और शाकाहार की…
अंततः आठ सौ वर्ष के बाद नालंदा विश्वविद्यालय पुनः उठ खड़ा हुआ
राम मंदिर 500 वर्ष बाद बनता है, नालन्दा विश्वविद्यालय 800 वर्ष बाद। यूँ ही किसी दिन कोणार्क में पुनः होगी सूर्यदेव की प्रतिष्ठा, मुल्तान के उस ऐतिहासिक शिवालय में कोई करेगा महामृत्युंजय…
छत्रपति शिवाजी महाराज ने डंके की चोट पर हिन्दवी साम्राज्य की घोषणा की
शिवा जी ने अपने साम्राज्य को कोई और नाम (शिवाजी साम्राज्य या मराठा साम्राज्य) नहीं दिया!! उन्होंने नाम दिया हिंदू साम्राज्य।
उन्होंने हिन्दूपदपादशाही की स्थापना की।
पिता कहीं नहीं जाते! वे हमेशा अपने बच्चों के आसपास ही होते हैं।
पिता गणित का वो सवाल हैं, जो अधिकांश विद्यार्थियों को सिलेबस खत्म होने के बाद समझ आता है। पिता जबतक होते हैं तबतक समझ नहीं आते।
क्या शाकाहार एक ‘सवर्णवादी’ विचार और वीगनवाद एक…
वामधारा का आरोप है कि "शाकाहार एक 'सवर्णवादी' विचार है, जिसे लोगों पर 'थोपा' जाता है और इसके बहाने विशेषकर ब्राह्मणवादी ताक़तें मुख्यतया मुसलमानों, दलितों और पिछड़ी जातियों पर निशाना साधती…
जातीय आरक्षण की आग में देश को जलने से बचाईए
आरक्षण खत्म करने का सिर्फ़ एक ही रास्ता है सभी उपक्रमों और सेवाओं का निजीकरण । देखिएगा तब देश के विकास की रफ़्तार चीन से भी तेज हो जाएगी । लिख कर रख लीजिए । बस एक ध्यान सर्वदा रखना पड़ेगा कि…
एक मृत चिड़िया का यह स्मारक दयाधर्म की कविता है!
चिड़िया का स्मारक! स्मारक तो साधारण मनुष्यों का भी नहीं बनता, केवल विशिष्टजनों की मृत्यु के बाद ही उनके लिए शिलालेख बनाए जाते हैं। तब उन नेक लोगों ने चिड़िया का स्मारक बनाकर यह संदेश दिया कि…