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Editorial
फ़ेसबुक पर ढपोरसंखी लेखकों की कम होती रीच का तराना और उन की फटी ढोल
ढपोरसंखी लेखक हैं जो अपने से असहमत लोगों को अनफ्रेंड कर देते हैं। ब्लाक कर देते हैं। फिर भी फ़ेसबुक पर , फ़ेसबुक के ही ख़िलाफ़ मुनादी करते फिरते हैं कि उन की रीच कम कर दी गई है।। यह फ़ेसबुक की…
रूसी अहंकार का यूक्रेन ने बाजा बजा दिया है ।
यह कैसी महाशक्ति है जो दो साल में यूक्रेन पर कब्ज़ा नहीं कर पायी और यूक्रेन वाले रूस के कुर्स्क एटॉमिक पॉवर प्लांट तक जा पहुँचे ?
140 करोड़ की आबादी के बावजूद ओलिम्पिक में एक अदद स्वर्ण हमारे लिए दिवास्वप्न है।
हमारे यहाँ खेल-प्रतिभाओं को पुरस्कृत करने वाली संस्कृति नहीं है और ऐसे में 140 करोड़ की आबादी के बावजूद ओलिम्पिक में एक अदद स्वर्ण हमारे लिए दिवास्वप्न है। ऐसा हम सोचेंगे तो अपने खिलाड़ियों…
ईरान का इसराइल पर हमले का दुस्साहस का वही हाल होगा जो सद्दाम हुसैन के इराक का हुआ था
इज़रायल यूँ तो अपने त्रिस्तरीय आयरन डोम से ईरानी मिसाइलों को जॉर्डन में ही मार गिरायेगा और अगर कुछ मिसाइलें निशाने पर पहुँच भी गईं तो इज़रायल के पास अपनी जनता के लिये ऐसे बंकर हैं जो परमाणु…
रमेश बैस : अब आगे क्या ?
रमेश बैस झिलमिलाती तकदीर वाले इंसान हैं। राजनीति में तकदीर भी बहुत मायने रखती है, इसका अनुपम उदाहरण बैस है।
हिंदुओं पर आक्रमण इस्लाम का प्रिय शग़ल क्यों है ?
बांगलादेश शैली की क्रांति यहाँ कभी भी घटित हो सकती है । मोदी समर्थकों को ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए स्वयं को तैयार रखना चाहिये । टूल किट के इरादे नेक नहीं हैं ।
इस्लामी राज में हिंदुओं का क्या हाल होता है बांगलादेश इसका ज्वलंत उदाहरण क्यों है?
नया मुल्ला ज़्यादा ही प्याज़ खाता है जैसा कि बांगलादेश में दिखाई दे रहा है । सबसे अधिक क्रूर ये कनवर्टेड मुसलमान ही होता है । बांगलादेश के हिंदुओं को अपनी रक्षा ख़ुद करनी होगी ।
भारत में सार्वजनिक-विमर्श स्पष्टतया हिन्दुत्व और ग़ैर-हिन्दुत्व खेमों में क्यों बट…
मुख्यधारा एंटी-हिन्दुत्व के फेर में प्रो-इस्लाम हो चुकी है और इस बात की शायद उसे अभी पूरी तरह से ख़बर नहीं है और अगर ख़बर हो भी तो वो इस पर विचार नहीं करना चाहेगी.
आने वाले दिन भारत में हिंसा , हत्या और अराजकता की चपेट में आने के दिन हैं
बांग्लादेश में बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की आदमक़द मूर्तियां खंडित होते देख कर पश्चिम बंगाल में नक्सल हिंसा की याद आ गई। जब रवींद्रनाथ टैगोर की मूर्तियां जगह-जगह तोड़ी गई थीं। बेटों के रक्त…
जमात बांग्लादेश को एक बुर्क़ाबंद चलते फिरते ताबूतों वाला मुल्क क्यों बनाना चाहता है?
जमात हैपीनेस की दुश्मन है वरना बांगलादेश हैपीनेस इंडेक्स में बहुत आगे निकल गया था हसीना राज में । धर्मनिरपेक्षता तो कुफ्र है , अच्छी अर्थव्यवस्था उन्हें रास नहीं आती । लोकतंत्र का इस्लाम में…