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Editorial
पैरों से तीर चला कर ओलंपिक मेडल जीतने वाली शीतल देवी आदर्श है अपनी पीढ़ी के लिए
शीतल देवी उसी दिन से विजेता है, जिस दिन उसने अपने पैरों से धनुष उठाना सीख लिया था। ओलंपिक का पदक तो उसकी बड़ी यात्रा का एक सुखद पड़ाव भर है।
IC 814 का अपहरण करने वाले अपहरणकर्ताओं को हिन्दू देवों का नाम दे दिया गया
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़े और नसीरुद्दीन शाह के नेशनल सिनेमा इंस्टिट्यूट से निकले अनुभव उन लोगों में से हैं जिन्हें हिन्दू परंपराओं से घृणा है। वे जब टांग उठाएंगे तो गोबर ही करेंगे।…
लखनऊ का रंग और रुआब
जैसे दिल्ली में इंडिया गेट है। मुंबई में गेट वे आफ इंडिया है। वैसे ही लखनऊ में रूमी दरवाज़ा है। लखनऊ का प्रवेश द्वार।
कोई कुछ भी कहे, कंगना मुझको तो अच्छी लगती हैं!
कंगना जैसी हैं, वैसी क्यों हैं? वो इतनी बदतमीज़ और मुँहफट क्यों हैं? उन्हें इतना ग़ुस्सा क्यों आता है? जब वो आप की अदालत में आईं तो अपनी पैरवी करने का उनका अंदाज़ वैसा ही था, जैसे तनु-मनु…
दो दो ओलंपिक गोल्ड जीतने वाली अवनी के साथ साथ देश को भी बधाई।
ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली अवनी जैसी लड़कियां हर समाज की जरूरत हैं। विपत्ति के मारे लोगों को अवनी जैसी लड़कियों की कहानी नया जीवन देती है। ऐसी कहानियां कही-सुनी जानी चाहिये।
अवनी…
साधु जैसे दिखने वाले बलराम बोस ममता के अत्याचार के विरुद्ध मुखर प्रतिरोध के प्रतीक बन…
बलराम बोस बताते हैं कि उन्होंने प्रशासन को इशारे से कहा कि सत्ता की गुलामी से मुक्त हो कर तनिक मनुष्य की भांति भी सोच लो। तुम्हारे घरों में भी बेटियां हैं, तुम्हे हमारे साथ खड़ा होना चाहिए।
पाठकों पर इन्फ्लुएंस डालते सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर
ये सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कौन होता है ?
रानी तेरो चिर जियो गोपाल !
चिर जीवे गोपाल... जुग जुग जीयो कन्हैया! तुम्हारा होना ही धर्म का होना है देवता! वही अज्ञानता का आनन्द...
कृष्ण अभी तक सबसे ज्यादा माने जाने के पश्चात सबसे कम समझे जाने वाले भगवान हैं
कृष्ण का दर्शन ही मेरे देखे '''' सहज मार्ग ''' है .... उन्होने अपनी चेतना को किसी भी बंधन में नहीं रखा ,,,, उन्होने परमात्मा को धर्म के नियमों के छाते के नीचे आकार देखने की बजाय ,,,,, खुले…
नीम करौली बाबा के कुछ प्रवचन बिल्कुल अपने घर के जिम्मेवार बुजुर्गों की सलाह जैसे हैं।
नीम करौली बाबा हनुमान जी के भक्त थे। हमेशा कम्बल लपेटे रहते थे। उत्तर प्रदेश के अकबरपुर से निकले तो देश के अनेक हिस्सों में घूमते रहे। जिधर गए उधर के भक्तों ने नया नाम दे दिया।